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राग भैरव

  • स्वर रिषभ, धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण। थाट भैरव। वादी/संवादी धैवत/रिषभ। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; प; ध१; - सा‘; ध१; प; रे१; मुख्य अंग रे१ रे१ सा; ध१ ध१ प; ग म ध१ ध१ प; ग म रे१ रे१ सा; , नि सा; आरोह-अवरोह सा रे१ ग म प ध१ नि सा’ - सा′ नि ध१ प म ग रे१ सा; विशेष - राग भैरव प्रभात बेला का प्रसिद्ध राग है। इसका वातावरण भक्ति रस युक्त गांभीर्य से भरा हुआ है। यह भैरव थाट का आश्रय राग है। इस राग में… (284 more words) …

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राग खम्बावती

  • स्वर आरोह में निषाद वर्ज्य। अवरोह में निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट खमाज। वादी/संवादी गंधार/धैवत। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; प; - ध; प; ग; सा; मुख्य अंग सा रे म ग म सा; रे म प ध; नि१ नि१ ध प ध प; म प ध सा′; प ध सा′ रे′ ग′ सा‘; रे’ नि१ ध सा′; ध म प; ग म सा; रे, नि१, ध सा; आरोह-अवरोह सा रे म प ध सा′ - सा′ नि१ ध प ध; म प; ग म सा; रे, नि१, ध सा; विशेष… (203 more words) …

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