CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 9 of 52)

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Patdeep

  • स्वर आरोह में रिषभ व धैवत वर्ज्य। गंधार कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण

  • थाट काफी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय दिन का तृतीय प्रहर। विश्रांति स्थान ग१; प; नि; – ध; प; रे; । मुख्य अंग ग१ म प नि सा′ ध प; म ग१ म प नि नि नि सा′; ध प म ग१ म प; प ग१ म; ग१ रे सा, नि, नि सा; ।आरोह-अवरोह, नि सा ग१ म प नि सा′ - सा′ नि ध प म ग१ रे सा, नि सा; ।विशेष - राग भीमपलासी में शुद्ध निषाद का प्रयोग करने पर राग पटदीप सामने आता है। राग भीमपलासी में वादी स्वर मध्यम है जबकि राग पटदीप का वादी स्वर

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Hamir

  • स्वर आरोह में रिषभ व पंचम वर्ज्य। मध्यम दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण वक्र

  • थाट कल्याण। वादी/संवादी धैवत/गंधार। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ध; सा’; - सा’; ध; प; रे; । मुख्य अंग प; ग म नि ध; ध प; ग म प ग म रे सा; । आरोह-अवरोह सा ग म ध; नि ध सा’; या सा ग म नि ध प; ग म ध नि सा’; - सा’ नि ध प; म् प ध प; ग म प; ग म रे सा; या सा′ नि ध प ग म रे सा; । विशेष - राग हमीर रात्रि के समय का वीर रस प्रधान और चंचल प्रक्रुति का राग है। यह कल्याण थाट का राग है। ग म न

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