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Durga

  • स्वर गंधार, निषाद वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव।थाट बिलावल। वादी/संवाद मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का दूसरा प्रहर

  • विश्रांति स्थान सा; रे; प; ध; - सा’; ध; म; रे;

  • मुख्य अंग म प ध; म रे, ध सा; रे रे प; । आरोह-अवरोह सा रे म प ध सा′ - सा′ ध प ध म रे सा, ध सा; । विशेष - रात्रि के रागों में राग दुर्गा बहुत मधुर और सब लोगों का प्रिय राग है। रे रे म रे; , ध, ध सा - यह स्वर संगती राग को स्पष्ट बनाती है। सभी शुद्ध स्वर लगने के… (134 more words) …

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राग हेमश्री

  • स्वर रिषभ व धैवत वर्ज्य। गंधार कोमल, दोनों निषाद। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। समय रात्री का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; प; - सा‘; प; म; मुख्य अंग, नि सा ग१ म प; म ग१ सा ग१, नि सा; ग१ म प सा’; नि१ प; म; प म ग१ म प; ग१ प म ग१ सा ग१, नि सा; आरोह-अवरोह, नि सा ग१ म प नि सा′ - सा′ नि१ प म ग१ म ग१ सा, नि, नि सा; विशेष - माधुर्य से परिपूर्ण राग हेमश्री की रचना आचर्य विश्वनाथ राव रिंगे ‘तनरंग’ द्वारा की गई… (57 more words) …

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