CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 8 of 52)

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Darbari Kanhada

  • स्वर गंधार, धैवत व निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर।

  • जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण वक्र।थाट आसावरी। वादी/संवादी रिषभ/पंचम। समय रात्रि का तीसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; रे; प; - सा’; प; रे;

  • मुख्य अंग सा रे ग१ (रे) ग१; म प ध१ (प) ध१ नि१ प; नि१ म प सा′; सा′ (नि१) ध१ नि१ प; म प (म) ग१ म रे सा; , ध१, नि१ सा; ।आरोह-अवरोह सा रे ग१ म प ध१ नि१ सा′ - सा′ ध१ नि१ प म प ग१ म रे सा; विशेष - राग दरबारी कान्हडा, तानसेन द्वारा बनाया हुआ राग है, यह धारणा प्रचिलित है। यह राग शांत और गम्भीर वातावरण पैदा क

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Rageshri

  • स्वर आरोह में रिषभ व पंचम वर्ज्य, अवरोह में पंचम वर्ज्य। निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - षाढव। थाट खमाज। वादी/संवादी गंधार/निषाद। समय रात्रि का द्वितीय प्रहर

  • विश्रांति स्थान ग; म; ध; ।मुख्य अंग, नि१, ध, नि१ सा; ग म रे सा; ग म ध नि१ ध म; ग म रे सा;

  • आरोह-अवरोह सा ग म ध नि१ सा′ - सा′ नि१ ध म ग म रे सा; । विशेष - यह बहुत ही मधुर राग है। संगीत शास्त्रों के अनुसार राग रागेश्री में निषाद शुद्ध और निषाद कोमल का प्रयोग बताया गया है। परन्तु वर्तमान में इस राग में सिर्फ कोमल निषाद

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