NTA-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 7 of 52)

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Hansdhwani

  • स्वर मध्यम, धैवत वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। थाट बिलावल। वादी/संवादी षड्ज/पंचम। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान ग प नि - सा′ नि प ग। मुख्य अंग, नि रे ग प ग रे ग प नि सा’; सा’ नि प ग रे ग प ग रे सा। आरोह-अवरोह सा रे ग प नि सा′ - सा′ नि प ग रे सा, नि, प, नि रे सा; । विशेष - यह राग कर्नाटक संगीत पद्धति से हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति में सम्मिलित किया गया है।
  • यह राग, राग शंकरा के करीब का राग है, पर इसमें धैवत वर्ज्य है। राग हंसध्वनि में नि प सा′ नि; प नि प ग; ग प

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Gujri Todi

  • स्वर पंचम वर्ज्य। रिषभ, गंधार व धैवत कोमल। मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - षाढव

  • थाट तोड़ी। वादी/संवादी धैवत/रिषभ। समय दिन का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान रे१; ग१; ध१; सा’;

  • मुख्य अंग सा रे१, नि, ध१ सा; रे१ ग१ म् ध१; म् ध१ नि ध१; नि ध१ म् ग१ रे१; ग१ रे१ सा;

  • आरोह-अवरोह सा रे१ ग म् ध१ नि सा′ - सा′ नि ध१ म् ध१ म् ग१ रे१ ग१ रे१ सा; , ध१, नि सा; । विशेष - राग तोडी में पंचम स्वर को वर्ज्य करने से एक अलग प्रभाव वाला राग गुर्जरी तोडी बनता है। इस राग को गुजरी तोडी भी कहते हैं।

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