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Jaunpuri

  • स्वर आरोह में गंधार वर्ज्य। गंधार, धैवत व निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - संपूर्ण

  • थाट आसावरी। वादी/संवादी धैवत/गंधार। समय दिन का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान रे; प; ध१; सा‘; - ध१; प; ग१; रे; । मुख्य अंग रे म प; ध१ म प सा’; रे′ नि१ ध१ प; म प नि१ ध१ प; ध१ म प ग१ रे म प; । आरोह-अवरोह सा रे म प ध१ नि१ सा′ - सा′ नि१ ध१ प म ग१ रे सा; । विशेष - राग जौनपुरी दिन के रागों में अति मधुर व विशाल स्वर संयोजन वाला सर्वप्रिय राग है।… (244 more words) …

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Khamaj

  • स्वर आरोह में रिषभ वर्ज्य। निषाद दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - सम्पूर्ण। थाट खमाज। वादी/संवादी गंधार/निषाद। समय रात्रि का द्वितीय प्रहर। विश्रांति स्थान सा म प - सा′ प ग। मुख्य अंग ग म प ध; ग म ग; प सा′ नि सा‘; नि१ ध प; म प म ग; रे सा; । आरोह-अवरोह सा ग म प ध नि सा’ - सा′ नि१ ध प म ग रे ग सा। विशेष: : रात्रि के रागों में श्रंगार रस के दो रूप, विप्रलंभ तथा उत्तान श्रंगार से ओत प्रोत है राग खमाज। चंचल प्रक्रुति की श्रंगार रस से… (242 more words) …

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