NTA-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 6 of 52)

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Deshkar

  • स्वर मध्यम, निषाद वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव वक्र। थाट बिलावल । वादी/संवादी धैवत/गंधार। समय दिन का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा प ध - सा′ ध प। मुख्य अंग सा रे ग प ध; ध ग प; सा′ ध; प ध ग प; ग रे सा; रे, ध सा;

  • आरोह-अवरोह सा रे ग प ध सा′ - सा′ ध प ध ग प ग रे सा; । विशेष - राग देशकार, राग भूपाली के निकट का राग है, इसलिये इसे गाते समय सावधानी बरतनी चाहिये। राग देशकार में शुद्ध धैवत बहुत प्रबल है। पंचम से आलाप का अन्त करना चाहिये। यह स्वर संगतियाँ राग देशकार का रूप दर्शा

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Khamaj

  • स्वर आरोह में रिषभ वर्ज्य। निषाद दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - सम्पूर्ण। थाट खमाज। वादी/संवादी गंधार/निषाद। समय रात्रि का द्वितीय प्रहर। विश्रांति स्थान सा म प - सा′ प ग। मुख्य अंग ग म प ध; ग म ग; प सा′ नि सा’; नि१ ध प; म प म ग; रे सा; । आरोह-अवरोह सा ग म प ध नि सा’ - सा′ नि१ ध प म ग रे ग सा। विशेष: : रात्रि के रागों में श्रंगार रस के दो रूप, विप्रलंभ तथा उत्तान श्रंगार से ओत प्रोत है राग खमाज। चंचल प्रक्रुति की श्रंगार रस से सजी हुई यह ठुमरी की रगिनी है। इस राग में गंभीरता की

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