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राग गोरख कल्याण

  • स्वर गंधार और पंचम वर्ज्य, आरोह में निषाद वर्ज्य। अवरोह में निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर।

  • जाति सुरतर - औढव। थाट खमाज। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; ध; - ध; म; रे; , नि१; मुख्य अंग सा रे म; रे म रे सा, नि१; , नि१, ध सा; रे म ध नि१ ध सा′; सा′ नि१ ध म रे; म रे सा, नि१; , नि१, ध रे सा; आरोह-अवरोह सा रे म ध सा′ - सा′ नि१ ध म रे सा, नि१; , नि१, ध रे सा; विशेष - यह एक बहुत ही मीठा… (285 more words) …

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Puriya

  • स्वर पंचम वर्ज्य। मध्यम तीव्र, रिषभ कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - षाढव। थाट मारवा। वादी/संवादी गंधार/निषाद। समय रात्री का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान ग म् नि - नि म् ग। मुख्य अंग ग म् ध ग म् ग; नि म् ग; ग म् ग रे१ सा; , नि रे१ ग; । आरोह-अवरोह, नि रे१ ग म् ध नि सा′ - सा′ नि ध म्; ग म् ध; ग म् ग रे१ सा; । विशेष - राग पूरिया रात्रि के रागों में अनूठा प्रभाव पैदा करता है। यह पूर्वांग प्रधान राग है। इस राग का विस्तार मन्द्र और मध्य… (185 more words) …

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