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Gujri Todi

  • स्वर पंचम वर्ज्य। रिषभ, गंधार व धैवत कोमल। मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - षाढव

  • थाट तोड़ी। वादी/संवादी धैवत/रिषभ। समय दिन का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान रे१; ग१; ध१; सा’;

  • मुख्य अंग सा रे१, नि, ध१ सा; रे१ ग१ म् ध१; म् ध१ नि ध१; नि ध१ म् ग१ रे१; ग१ रे१ सा;

  • आरोह-अवरोह सा रे१ ग म् ध१ नि सा′ - सा′ नि ध१ म् ध१ म् ग१ रे१ ग१ रे१ सा; , ध१, नि सा; । विशेष - राग तोडी में पंचम स्वर को वर्ज्य करने से एक अलग प्रभाव वाला राग गुर्जरी तोडी बनता है।… (153 more words) …

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Vibhas

  • स्वर मध्यम व निषाद वर्ज्य। रिषभ व धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव ।थाट भैरव। वादी/संवादी धैवत/रिषभ। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान रे१; प; ध१; । मुख्य अंग प ध१ ध१ प; ग प ग रे१ सा; । आरोह-अवरोह सा रे१ ग प ध१ सा′ - सा′ ध१ प ग रे१ सा; । विशेष - राग देशकार के रिषभ और धैवत कोमल कर देने से ही राग विभास बन जाता है। इस राग में राग भैरव के समान रिषभ और धैवत पर आंदोलन नही करना चाहिये।
  • इस राग में गंधार और पंचम की संगति बहुत… (90 more words) …

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