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Kaafi

  • स्वर गंधार व निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण । थाट काफी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय रात्री का द्वितीय प्रहर। विश्रांति स्थान सा प - सा′ प रे। मुख्य अंग ग१ रे; म प; म प ध प; ध नि१ सा′; नि१ ध प; । आरोह-अवरोह सा रे ग१ म प ध नि१ सा′ - सा′ नि१ ध प म ग१ रे सा;

  • विशेष - राग काफी रात्रि के समय की भैरवी है। इस राग में पंचम बहुत खुला हुआ लगता है। राग को सजाने में कभी कभी आरोह में गंधार को वर्ज्य करते हैं जैसे - रे… (178 more words) …

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राग जोगकौंस

  • स्वर रिषभ वर्ज्य। दोनों निषाद, दोनों गंधार, धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - षाढव वक्र। थाट किसी भी थाट के अंतर्गत नहीं। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का तीसरा प्रहर । विश्रांति स्थान सा; म; - म; सा; मुख्य अंग ग म; ग म प म; ग म ध१ नि सा′; सा′ नि ध१; प ध१ नि१ ध१ म प म; ग म (सा) ग१ सा; आरोह-अवरोह सा ग म ध१ नि सा′ - सा′ नि ध१ प म; प ध१ नि१ ध१ प म; ग म (सा) ग१ सा; विशेष - यह एक अपेक्षाकृत नया राग है जो… (242 more words) …

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