CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 49 of 52)

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राग मधुवंती

  • स्वर आरोह में रिषभ व धैवत वर्ज्य। गंधार कोमल, मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण। थाट तोड़ी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय दिन का चतुर्थ प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग१; प; नि; - सा’; नि; प; रे; मुख्य अंग, नि सा म् ग१ म् प; म् ग१ सा रे सा; आरोह-अवरोह, नि सा ग१ म् प नि सा’ - सा′ नि ध प म् ग१ म् ग१ रे सा, नि सा; विशेष - यह अपेक्षाकृत नया राग है। पूर्व में यह राग अम्बिका के नाम से जाना जाता था। यह श्रृंगार रस से परिपूर्ण होने के कारण श्रोताओं पर अपना गहरा प्रभाव डालता है।

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राग जलधर केदार

  • स्वर गंधार व निषाद वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव-औढव। थाट बिलावल। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान म; सा; मुख्य अंग सा रे सा म; म रे प म; म प ध सा′; रे′ सा′ ध प म; प म रे सा; आरोह-अवरोह सा रे सा म; म रे प म; म प ध सा′ - सा′ ध प म; प म रे सा; विशेष - यह केदार अंग का राग है। इस राग में राग दुर्गा के स्वर होते हुए भी राग केदार दिखाया जाता है। केदार का अंग स्पष्ट दिखाने के लिये इसमें मध्यम पर विश्रांति देते हैं जैसे - सा रे सा म; ध प म; सा ध प ध प म

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