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राग जोगेश्वरी

  • स्वर रिषभ व पंचम वर्ज्य। निषाद कोमल, दोनों गंधार। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव । समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग म; ध; - ध; म; ग; सा; । मुख्य अंग सा ग म ग१ सा; , नि१, ध; , म, ध, नि१ सा; सा ग म; नि१ ध म; ध नि१ सा′; सा′ ध; नि१ म; ध ग; म ग१ सा;

  • आरोह-अवरोह सा ग म ध नि१ सा′ - सा′ नि१ ध म ग म ग१ सा; विशेष - पंडित रवि शंकर जी द्वारा बनाया गया राग जोगेश्वरी, अत्यंत मधुर और सीधा राग है।… (129 more words) …

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Bahaar

  • स्वर आरोह में रिषभ और पंचम वर्ज्य। अवरोह में धैवत वर्ज्य। गंधार कोमल, निषाद दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - षाढव वक्र। थाट काफी। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का दूसरा प्रहर या वसंत व शरद ऋतु में हर समय गाया जा सकता है। विश्रांति स्थान सा; म; प; - सा’; म; रे;

  • मुख्य अंग सा म; प म ग१ म; , नि१ प म; म नि१ ध नि सा′; नि१ प म; प म; ग१ म रे सा; । आरोह-अवरोह सा रे सा म; प म ग१ म; ध नि सा′ - सा′ नि१ प म; ग१ म रे… (229 more words) …

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