NTA-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 48 of 52)

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राग भैरव (Raga Bhairav)

  • स्वर रिषभ, धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण। थाट भैरव। वादी/संवादी धैवत/रिषभ। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; प; ध१; - सा’; ध१; प; रे१; मुख्य अंग रे१ रे१ सा; ध१ ध१ प; ग म ध१ ध१ प; ग म रे१ रे१ सा; , नि सा; आरोह-अवरोह सा रे१ ग म प ध१ नि सा’ - सा′ नि ध१ प म ग रे१ सा; विशेष - राग भैरव प्रभात बेला का प्रसिद्ध राग है। इसका वातावरण भक्ति रस युक्त गांभीर्य से भरा हुआ है। यह भैरव थाट का आश्रय राग है। इस राग में रिषभ और धैवत स्वरों को आंदोलित करके लगाया जाता

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राग गौड मल्हार (Raga Goud Malhara)

  • स्वर दोनों निषाद (आरोह में शुद्ध, अवरोह में कोमल) । शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण वक्र। थाट बिलावल। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय वर्षा ऋतु में रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; प; - सा’; प; म; । मुख्य अंग सा रे ग म; रे ग म ग म, ग रे ग (रे) सा; म प ध नि१ प; म प ध नि सा’; आरोह-अवरोह सा रे ग म; रे प; म प ध नि सा’ - सा′ नि१ ध नि१ प म; ग रे ग (रे) सा; रे ग म; विशेष - यह बहुत ही मधुर, चित्ताकर्षक और प्रभावशाली राग है परन्तु गाने में कठिन है। यह राग बहुत प्रचलन में है

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