Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 130 key topics of CBSE-NET (UGC) Hindustani Music (Paper-II & Paper-III) covering entire 2017 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or .

Rs. 200.00 or

Darbari Kanhada

  • स्वर गंधार, धैवत व निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर।

  • जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण वक्र।थाट आसावरी। वादी/संवादी रिषभ/पंचम। समय रात्रि का तीसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; रे; प; - सा’; प; रे;

  • मुख्य अंग सा रे ग१ (रे) ग१; म प ध१ (प) ध१ नि१ प; नि१ म प सा′; सा′ (नि१) ध१ नि१ प; म प (म) ग१ म रे सा; , ध१, नि१ सा; ।आरोह-अवरोह सा रे ग१ म प ध१ नि१ सा′ - सा′ ध१ नि१ प म प ग१ म रे सा; विशेष - राग दरबारी कान्हडा, तानसेन द्वारा बनाया हुआ राग है, यह धारणा प्रचिलित है।… (210 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

SHOBHAVARI

  • स्वर गंधार व निषाद वर्ज्य। धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। समय दिन का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; प; - सा’; प; म;
  • मुख्य अंग रे म प; ध१ प म रे म; प ध१ प म रे सा; । आरोह-अवरोह सा रे म प ध१ सा′ - सा′ ध१ प म रे सा; , ध१ सा; । विशेष - यह बहुत ही मधुर राग है, लेकिन प्रचार में कम है। राग दुर्गा में, धैवत शुद्ध न लेते हुए धैवत कोमल लेने से शोभावरी हो जाता है। यह राग आसावरी थाट के अंतर्गत आता है।… (113 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

f Page
Sign In