CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 45 of 52)

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राग गुणकली

  • स्वर गंधार व निषाद वर्ज्य। रिषभ व धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव-औढव। थाट भैरव। वादी/संवादी धैवत/रिषभ। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; रे१; ध१; - ध१; रे१; सा; मुख्य अंग सा रे म प ध१; प ध१ म रे१; रे१ सा, ध१ सा; म प ध१ ध१ सा′; ध१ प ध१ म; प म रे१ सा; आरोह-अवरोह सा रे१ म प ध१ सा′ - सा′ ध१ प म रे१ रे१ सा, ध१ सा; विशेष - करुणा और भक्ति रस से परिपूर्ण यह प्रातः कालीन राग श्रोताओं की भावनाओं को आध्यात्मिक दिशा की और ले जाने में समर्थ है। राग दुर्गा में रिषभ और धैवत कोमल कर

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राग खम्बावती

  • स्वर आरोह में निषाद वर्ज्य। अवरोह में निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट खमाज। वादी/संवादी गंधार/धैवत। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; प; - ध; प; ग; सा; मुख्य अंग सा रे म ग म सा; रे म प ध; नि१ नि१ ध प ध प; म प ध सा′; प ध सा′ रे′ ग′ सा’; रे’ नि१ ध सा′; ध म प; ग म सा; रे, नि१, ध सा; आरोह-अवरोह सा रे म प ध सा′ - सा′ नि१ ध प ध; म प; ग म सा; रे, नि१, ध सा; विशेष - राग खम्बावती बहुत ही मधुर राग है। राग झिंझोटी, जो की ज्यादा प्रचलन में है, इससे मिलता

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