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राग जोगिया

  • स्वर आरोह में गंधार व निषाद वर्ज्य, अवरोह में गंधार वर्ज्य। रिषभ व धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - षाढव। थाट भैरव। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय ब्राह्म मुहुर्त। विश्रांति स्थान सा; म; प; ध१; - सा‘; ध१; म; रे१; मुख्य अंग रे१ म म; म प ध१; प ध१ नि ध१ प; प ध१ म रे१ सा; आरोह-अवरोह सा रे१ म प ध१ सा’ - सा′ नि ध१ प; म म रे१ सा; विशेष - इस राग को जोगी नाम से भी जाना जाता है। राग भैरव के सामन ही इसमें रिषभ और धैवत कोमल लगते हैं, पर उन्हे… (187 more words) …

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राग कोमल रिषभ आसावरी

  • स्वर आरोह में गंधार व निषाद वर्ज्य। अवरोह में पंचम वर्ज्य। रिषभ, गंधार, धैवत व निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - षाढव वक्र। थाट भैरवी। वादी/संवादी धैवत/रिषभ। समय दिन का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; प; ध१; - ध१; म; रे१; मुख्य अंग म प ध१ सा′; रे१′ नि१ ध१ म ग१ रे१; ग१ रे१ सा; आरोह-अवरोह सा रे१ म प ध१ सा′ - सा′ रे१′ नि१ ध१ म प ध१ म ग१ रे१ ग१ रे१, नि१, ध१ रे१ सा; विशेष - यह एक बहुत ही मधुर दिन का राग है। इसे आसवारी तोड़ी भी कहा जाता… (320 more words) …

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