CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 43 of 52)

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राग रामकली

  • स्वर रिषभ व धैवत कोमल, दोनों मध्यम व दोनों निषाद। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण। थाट भैरव। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान प; ध१; - सा’; प; रे१; मुख्य अंग म् प ध१ नि१ ध१ प; म् प ग म रे१ सा; आरोह-अवरोह सा रे१ ग म प ध१ नि सा’ - सा′ नि ध१ प; म् प ध१ नि१ ध१ प; म् प ग म रे१ सा; विशेष - ये भैरव अंग का राग है। इसमें रिषभ और धैवत पर राग भैरव की तरह अन्दोलन नहीं किया जाता।

  • इस राग को भैरव से अलग दिखाने के लिये इसका विस्तार मध्य और तार सप्तक में वि

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राग कलावती

स्वर रिषभ और मध्यम वर्ज्य। निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। थाट खमाज। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय मध्य रात्री। विश्रांति स्थान ग ध - ध ग। मुख्य अंग सा ग प ध; प ध नि१ ध; ध प; ग प ध सा′ नि१; ध नि१ सा′; नि१ प; ध ग; प ग सा′; , नि१, ध सा; आरोह-अवरोह सा ग प ध नि१ सा′ - सा′ नि१ ध प ग प ग सा; , नि१, ध सा; विशेष: राग कलावती एक बहुत ही मधुर और सरल राग है। इसके पूर्वांग में रिषभ और मध्यम वर्ज्य होने से अधिक सावधानी की आवश्यकता होती है। यह स्वर संगतियाँ राग कलावती का रूप दर्शाती हैं -

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