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राग हंस किंकिणी

  • स्वर आरोह में रिषभ व धैवत वर्ज्य। दोनों गंधार व दोनों निषाद। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट काफी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय दिन का तीसरा प्रहर। विश्रांति स्थान रे; प; नि; - सा‘; नि; प; रे; मुख्य अंग ग म ध प; म प ग१ रे सा; , नि सा ग म प प; म प; म नि१ ध प; ध प म प; ग म ध प ग१ रे सा; आरोह-अवरोह, नि सा ग म प नि सा’ - सा′ नि१ ध प म प ग म प ग१ रे सा, नि सा; विशेष - यह… (158 more words) …

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Nat Bhairav

  • स्वर धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण। थाट भैरव। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान रे; म; ध१; - ध१; म; रे; । मुख्य अंग रे ग म ध१ प; म ग रे; ग म रे सा, नि, ध१ सा; । आरोह-अवरोह सा रे ग म प ध१ नि सा′ - सा′ नि ध१ प म ग रे सा; । विशेष - राग नट भैरव, राग नट और राग भैरव से मिल कर बना है। पुर्वांग में राग नट और उत्तरांग में राग भैरव।

  • राग नट का स्वरूप है - म ग म रे;… (126 more words) …

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