CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 40 of 52)

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राग सुन्दरकौंस

  • स्वर रिषभ व पंचम वर्ज्य। गंधार व निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; ध; - सा’; ध; म; मुख्य अंग, नि१, नि१, ध; , ध, नि१ सा; ग१ म ग१ सा; ग१ म ध; नि१ ध; म ध नि१ सा’; सा′ ध नि१ ध म ग१ सा; आरोह-अवरोह सा ग१ म ध नि१ सा′ - सा′ नि१ ध म ग१ म ग१ सा, नि१ सा; विशेष - यह राग बहुत ही प्रभावी और चित्ताकर्षक है। राग मालकौंस के कोमल धैवत की जगह जब शुद्ध धैवत का प्रयोग होता है तब राग सुन्दरकौंस की उत्पत्ति होती है। स्वरों के इस समुदाय (सा ग१ म

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राग तिलंग बहार

  • स्वर रिषभ वर्ज्य आरोह में। दोनों गंधार और दोनों निषाद। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - संपूर्ण वक्र। समय रात्रि का द्वितीय प्रहर। विश्रांति स्थान सा म प - सा′ प म ग; मुख्य अंग म प म ग; म; नि१ प म; प नि सा′; ग१ म प म ग१ म रे सा; आरोह-अवरोह सा रे सा म; ग म प नि१ प; म ध नि सा′ - सा′ नि१ प म ग१ म रे सा; विशेष - राग तिलंग बहार, राग तिलंग और राग बहार का मिश्रण है। इन दोनों रागों के स्वर राग तिलंग बहार को मधुरता प्रदान करते हैं। यह स्वर संगतियाँ राग तिलंग बहार का रूप दर्शाती हैं -

  • ग म; ग म

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