CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 4 of 52)

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Vibhas

  • स्वर मध्यम व निषाद वर्ज्य। रिषभ व धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव ।थाट भैरव। वादी/संवादी धैवत/रिषभ। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान रे१; प; ध१; । मुख्य अंग प ध१ ध१ प; ग प ग रे१ सा; । आरोह-अवरोह सा रे१ ग प ध१ सा′ - सा′ ध१ प ग रे१ सा; । विशेष - राग देशकार के रिषभ और धैवत कोमल कर देने से ही राग विभास बन जाता है। इस राग में राग भैरव के समान रिषभ और धैवत पर आंदोलन नही करना चाहिये।
  • इस राग में गंधार और पंचम की संगति बहुत मधुर लगती है, जैसे - प ध१ प ग प; सा ग प ग प; सा′ ध

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JHINJHOTI

  • स्वर आरोह में निषाद वर्ज्य। अवरोह में निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - सम्पूर्ण वक्र

  • थाट खमाज। वादी/संवादी गंधार/निषाद। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; प; ध; - सा’; प; ग; । मुख्य अंग, ध सा रे म ग; रे ग सा रे, नि१, ध, प, ध सा; , प, ध सा रे ग म ग; म ग रे सा; रे, नि१, ध सा। आरोह-अवरोह सा रे म प ध सा’ - सा′ नि१ ध प म ग रे ग सा; । विशेष - राग झिंझोटी चंचल प्रकृति का राग है इसीलिए यह राग वाद्य यन्त्रों के लिये बहुत उपयुक्त है। इसमे श्रृंगार रस की अनुभूति होती है अ

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