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Patdeep

  • स्वर आरोह में रिषभ व धैवत वर्ज्य। गंधार कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण

  • थाट काफी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय दिन का तृतीय प्रहर। विश्रांति स्थान ग१; प; नि; – ध; प; रे; । मुख्य अंग ग१ म प नि सा′ ध प; म ग१ म प नि नि नि सा′; ध प म ग१ म प; प ग१ म; ग१ रे सा, नि, नि सा; ।आरोह-अवरोह, नि सा ग१ म प नि सा′ - सा′ नि ध प म ग१ रे सा, नि सा; ।विशेष - राग भीमपलासी में शुद्ध निषाद का प्रयोग करने पर राग पटदीप सामने… (165 more words) …

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Deshkar

  • स्वर मध्यम, निषाद वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव वक्र। थाट बिलावल । वादी/संवादी धैवत/गंधार। समय दिन का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा प ध - सा′ ध प। मुख्य अंग सा रे ग प ध; ध ग प; सा′ ध; प ध ग प; ग रे सा; रे, ध सा;

  • आरोह-अवरोह सा रे ग प ध सा′ - सा′ ध प ध ग प ग रे सा; । विशेष - राग देशकार, राग भूपाली के निकट का राग है, इसलिये इसे गाते समय सावधानी बरतनी चाहिये। राग देशकार में शुद्ध धैवत बहुत प्रबल है। पंचम से आलाप… (352 more words) …

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