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राग शुद्ध कल्याण

  • स्वर मध्यम और निषाद वर्ज्य आरोह में। अवरोह में मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट कल्याण। वादी/संवादी गंधार/धैवत। समय रात्रि का प्रथम प्रहर । विश्रांति स्थान सा ग प - प ग सा; मुख्य अंग ग रे ग; रे सा; , नि, ध, प; ग रे सा; ग रे ग; प रे सा; आरोह-अवरोह सा रे ग प ध सा′ - सा′ नि ध प म् ग रे सा; ग रे ग प रे सा; विशेष - राग शुद्ध कल्याण में आरोह में राग भूपाली और अवरोह में राग यमन के स्वर प्रयुक्त होते हैं।… (144 more words) …

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Yaman

  • स्वर मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण। थाट कल्याण। वादी/संवादी गंधार/निषाद

  • समय रात्रि का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; नि; - सा‘; नि; प; ग; । मुख्य अंग, नि रे ग; , नि रे म् ग; म् प; म् ध प नि ध प म् रे ग रे; , नि रे, ध, नि सा; ।आरोह-अवरोह, नि रे सा; , नि रे ग म् प ध नि सा’ - सा′ नि ध प म् ग रे सा; , नि रे सा; । विशेष - इस राग का प्राचीन नाम कल्याण है। कालांतर में मुगल शासन के समय… (354 more words) …

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