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Bageshri

  • स्वर आरोह में पंचम वर्ज्य, गंधार व निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट काफी । वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; ध; - सा‘; ध; म; ग१; । मुख्य अंग, नि१ सा म; सा ग१ म; ग१ रे सा; , नि१, ध; म ध नि१ ध; म ग१ रे सा; ।आरोह-अवरोह सा रे ग१ म ध नि१ सा’ - सा′ नि१ ध म प ध म ग१ रे सा, नि१ सा; । विशेष - राग बागेश्री रात्रि के रागों में भाव तथा रस का स्त्रोत बहाने वाला मधुर राग है।… (347 more words) …

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Alhaiya Bilawal

  • स्वर आरोह में मध्यम वर्ज्य। निषाद दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - सम्पूर्ण।थाट- बिलावल। वादी/संवादी धैवत/गंधार।समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; प; - सा’; प; ग;

  • मुख्य अंग ग रे ग प; ध नि१ ध प; म ग रे; ग प ध नि सा‘; ।आरोह-अवरोह सा रे ग प ध नि सा’ - सा′ नि ध प ध नि१ ध प म ग रे सा; । विशेष: राग बिलावल में कोमल निषाद के प्रयोग से राग अल्हैया बिलावल का निर्माण हुआ है। इसके अवरोह में निषाद कोमल का प्रयोग अल्प तथा वक्रता से किया जाता है… (206 more words) …

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