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राग भटियार

  • स्वर मध्यम दोनों। रिषभ कोमल। शेष शुद्ध स्वर।

  • जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण वक्र। थाट मारवा। वादी/संवादी शुद्ध मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का अन्तिम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; प; ध; - म; सा; मुख्य अंग सा म प; प ग रे१ सा; सा ध नि ध; नि प; ध म; प ग; प ग रे१ सा; म् ध सा′; आरोह-अवरोह सा रे१ सा; सा म; म ध प; सा ध; ध नि प म; प ग; म् ध सा′ - सा′ रे१′ नि ध प; ध नि प म; प ग रे१ सा; विशेष: राग भटियार मारवा ठाट से उत्पन्न राग… (177 more words) …

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राग कौसी कान्हडा (राग कौशी कान्हडा)

  • स्वर गंधार, धैवत व निषाद कोमल। आरोह में रिषभ व पंचम वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर। आरोह में रिषभ का प्रयोग कभी कभी किया जाता है।

  • जाति षाढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट आसावरी। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का तीसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; - सा‘; म; मुख्य अंग ग१ म ध१ प; म ग१ रे; ग१ म सा; ग१ म प म ग१ रे; ग१ सा, ध१, नि१ रे सा; आरोह-अवरोह, नि१ सा ग१ म ध१ नि१ सा’ - सा′ नि१ ध१ प म ग१ रे ग१ म रे सा; विशेष - यह राग दो विभिन्न अंगों द्वारा गाया जाता… (195 more words) …

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