CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 36 of 52)

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राग गोरख कल्याण

  • स्वर गंधार और पंचम वर्ज्य, आरोह में निषाद वर्ज्य। अवरोह में निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर।

  • जाति सुरतर - औढव। थाट खमाज। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; ध; - ध; म; रे; , नि१; मुख्य अंग सा रे म; रे म रे सा, नि१; , नि१, ध सा; रे म ध नि१ ध सा′; सा′ नि१ ध म रे; म रे सा, नि१; , नि१, ध रे सा; आरोह-अवरोह सा रे म ध सा′ - सा′ नि१ ध म रे सा, नि१; , नि१, ध रे सा; विशेष - यह एक बहुत ही मीठा और प्रभावशाली राग है। आरोह में तीन स्वर वर्ज्य होने के कारण इस रा

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राग हेमश्री

  • स्वर रिषभ व धैवत वर्ज्य। गंधार कोमल, दोनों निषाद। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। समय रात्री का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; प; - सा’; प; म; मुख्य अंग, नि सा ग१ म प; म ग१ सा ग१, नि सा; ग१ म प सा’; नि१ प; म; प म ग१ म प; ग१ प म ग१ सा ग१, नि सा; आरोह-अवरोह, नि सा ग१ म प नि सा′ - सा′ नि१ प म ग१ म ग१ सा, नि, नि सा; विशेष - माधुर्य से परिपूर्ण राग हेमश्री की रचना आचर्य विश्वनाथ राव रिंगे ‘तनरंग’ द्वारा की गई है. यह स्वर संगतियाँ राग हेमश्री का रूप दर्शाती हैं - सा ग१ म प म; ग१ म प

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