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राग देवगिरि बिलावल

  • स्वर आरोह में मध्यम वर्ज्य। निषाद दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट बिलावल। वादी/संवादी षड्ज/पंचम। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; प; - प; ग; सा; मुख्य अंग सा; , ध, नि, ध सा रे ग; ग रे सा; , ध, प ग; , नि रे ग म ग; ग प म; ग रे सा; आरोह-अवरोह सा रे ग प ध नि सा′ - सा′ नि ध प; ध नि१ ध प; म ग रे सा; , नि सा; , ध, प ग रे सा; विशेष: राग देवगिरि बिलावल, शुद्ध कल्याण और बिलावल… (160 more words) …

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राग देस

  • स्वर आरोह में गन्धार, धैवत वर्ज्य। निषाद दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट खमाज। वादी/संवादी रिषभ/पंचम। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान रे; प; नि; सा‘; - सा‘; प; रे; मुख्य अंग ध म ग रे; ग, नि सा; रे म प नि; सा’ रे′ नि१ ध प। आरोह-अवरोह सा रे म प नि सा′ - सा′ नि१ ध प ध म ग रे ग, नि सा; विशेष - यह बहुत ही मधुर राग है और ध म ग रे; ग, नि सा; इन स्वरों से पहचाना जाता है।

  • इस राग में षड्ज-मध्यम और षड्ज-पंचम… (43 more words) …

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