NTA-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 33 of 52)

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राग भूपाल तोडी (Raga Bhopal Todi)

स्वर मध्यम और निषाद वर्ज्य। रिषभ, गन्धार और धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। थाट भैरवी। वादी/संवादी धैवत/गंधार। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग१; प; ध१; - ध१; प; ग१; सा; मुख्य अंग सा, ध१ सा रे१ ग१; ध१ प ग१ रे१ ग१ रे१ सा; आरोह-अवरोह सा रे१ ग१ प ध१ सा′ - सा′ ध१ प ग१ रे१ सा, ध१ रे१ सा; विशेष - राग भूपाल तोडी, शुद्धता और पवित्रता का सूचक है। इसलिये इस राग में भक्ति रस से परिपूर्ण बन्दिशें अधिक सुनायी देतीं हैं। राग भूपाली में राग तोडी जैसे स्वर लेने पर राग भूपाल त

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राग देव गन्धार (राग द्वि गंधार) (Raga Dev Gandhar (Raga Bi Gandhar) )

  • स्वर धैवत, निषाद कोमल, गंधार दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण वक्र। थाट आसावरी। वादी/संवादी धैवत/गंधार। समय दिन का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान ग; म; प; - सा’; प; रे; मुख्य अंग, ध१, नि१ सा रे ग म ग म; ध१ म प नि१ ध१ प; ध१ म प ग रे सा; रे ग म; प ग रे सा; ध१ म प ग१ रे ग म ग१ रे सा; आरोह-अवरोह सा रे ग म प म ग१ रे ग म प ध१ नि१ सा’ - सा′ नि१ ध१ प म प ग१ रे ग म ग१ रे सा; विशेष - इस राग का विस्तार राग जौनपुरी के समान होता है। राग गांधारी भी इसके पास का राग है परन्तु राग गांधा

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