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राग देवसाख

स्वर आरोह में गन्धार, धैवत वर्ज्य। अवरोह में धैवत वर्ज्य। गन्धार, निषाद कोमल (क्वचित निषाद शुद्ध) । शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - षाढव वक्र। थाट काफी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय दिन का तीसरा प्रहर। आरोह-अवरोह सा रे म प नि१ सा′ - सा′ नि१ प म प ग१ म ग१ रे सा, नि१ सा;

राग कौशिक ध्वनि (राग भिन्न षड्ज)

  • स्वर रिषभ व पंचम वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर।

  • जाति औढव - औढव। थाट बिलावल। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; म; ध; नि; मुख्य अंग ग म ध नि ध सा′; नि सा′ ध; ग म; ध म ग सा; आरोह-अवरोह सा ग म ध नि सा′ - सा′ नि ध म ग सा; विशेष - प्राचीन राग भिन्न-षड्ज को वर्तमान में कौशिक-ध्वनि के नाम से जाना जाता है। इसका वादी स्वर मध्यम होते हुए भी इसके बाकी स्वर भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जिन पर ठहराव किया जा सकता है। इस कारण इस राग… (107 more words) …

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राग तिलंग बहार

  • स्वर रिषभ वर्ज्य आरोह में। दोनों गंधार और दोनों निषाद। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - संपूर्ण वक्र। समय रात्रि का द्वितीय प्रहर। विश्रांति स्थान सा म प - सा′ प म ग; मुख्य अंग म प म ग; म; नि१ प म; प नि सा′; ग१ म प म ग१ म रे सा; आरोह-अवरोह सा रे सा म; ग म प नि१ प; म ध नि सा′ - सा′ नि१ प म ग१ म रे सा; विशेष - राग तिलंग बहार, राग तिलंग और राग बहार का मिश्रण है। इन दोनों रागों के स्वर राग तिलंग बहार को मधुरता… (46 more words) …

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