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Vrindavani Sarang

  • स्वर गंधार व धैवत वर्ज्य। निषाद दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। थाट काफी। वादी/संवादी रिषभ/पंचम। समय मध्यान्ह। विश्रांति स्थान सा; रे; प; नि; - सा’; प; रे; । मुख्य अंग रे म; प रे; म रे, नि सा; म प, नि१ प म रे, नि सा;

  • आरोह-अवरोह सा रे म प नि सा′ - सा′ नि१ प म रे सा; । विशेष - राग सारंग को राग बृंदावनी सारंग भी कहा जाता है। यह एक अत्यंत मधुर व लोकप्रिय राग है। इस राग में रे-प, म-नि, नि१-प, म-रे की स्वर संगतियाँ राग वाचक तथा चित्ताकर्षक हैं। इस… (141 more words) …

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राग शंकरा

  • स्वर आरोह में रिषभ व मध्यम वर्ज्य। अवरोह में मध्यम वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर। (अवरोह में धैवत अल्प) । जाति औढव - षाढव वक्र। थाट बिलावल। वादी/संवादी गंधार/निषाद। समय रात्री का द्वितीय प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; प; नि; - नि; प; ग; सा; मुख्य अंग ग प नि ध सा′ नि; ध प ग प; प रे ग रे सा; आरोह-अवरोह सा ग प नि ध सा′ - सा′ नि प ग; प ध प ग; प ग रे सा; विशेष - राग शंकरा की प्रकृति उत्साहपूर्ण, स्पष्ट तथा प्रखर है। यह राग वीर रस से परिपूर्ण है। यह… (219 more words) …

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