NTA-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 30 of 52)

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राग मेघ मल्हार (राग मेघ)

  • स्वर गंधार व धैवत वर्ज्य। निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। थाट काफी। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय वर्षा ऋतु। विश्रांति स्थान सा; म; प; - प; म; रे; मुख्य अंग, नि१ सा रे प म रे; म प म रे; म प; प म नि प म रे; रे रे प म रे; रे सा, नि१ सा; आरोह-अवरोह सा (म) रे म प नि१ सा - सा′ नि१ प म रे सा रे, नि१ सा; विशेष - राग मेघ मल्हार बहुत ही मधुर और गंभीर वातावरण पैदा करने वाला राग है। इस राग के सभी स्वर राग मधुमाद सारंग के ही सामान हैं। परन्तु राग मधुमाद सारंग में सारंग अंग प्रभावी हो

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राग पूरिया-धनाश्री

  • स्वर रिषभ व धैवत कोमल। मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण वक्र। थाट पूर्वी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय दिन का चतुर्थ प्रहर - संधि-प्रकाश राग। विश्रांति स्थान सा; ग; प; नि; - सा’; प; ग; रे१; मुख्य अंग, नि रे१ ग म् प; प म् ग म् रे१ ग; म् ध१ प; म् ध१ नि सा’; नि रे१’; नि ध१ प; प ध१ प प म् ग म् रे१ ग; रे१ सा; आरोह-अवरोह, नि रे१ सा; , नि रे१ ग म् प; म् ध१ नि सा′ - सा′ नि ध१ प म् ग म् रे१ ग रे१ सा; विशेष - राग पूरिया धनाश्री एक सायंकालीन संधि प्रकाश राग है। यह करुणा रस

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