CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 3 of 52)

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Bageshri

  • स्वर आरोह में पंचम वर्ज्य, गंधार व निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट काफी । वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; ध; - सा’; ध; म; ग१; । मुख्य अंग, नि१ सा म; सा ग१ म; ग१ रे सा; , नि१, ध; म ध नि१ ध; म ग१ रे सा; ।आरोह-अवरोह सा रे ग१ म ध नि१ सा’ - सा′ नि१ ध म प ध म ग१ रे सा, नि१ सा; । विशेष - राग बागेश्री रात्रि के रागों में भाव तथा रस का स्त्रोत बहाने वाला मधुर राग है। इस राग को बागेसरी, बागेश्वरी आदि नामों से भी पुकारा जाता

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Bahaar

  • स्वर आरोह में रिषभ और पंचम वर्ज्य। अवरोह में धैवत वर्ज्य। गंधार कोमल, निषाद दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - षाढव वक्र। थाट काफी। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का दूसरा प्रहर या वसंत व शरद ऋतु में हर समय गाया जा सकता है। विश्रांति स्थान सा; म; प; - सा’; म; रे;

  • मुख्य अंग सा म; प म ग१ म; , नि१ प म; म नि१ ध नि सा′; नि१ प म; प म; ग१ म रे सा; । आरोह-अवरोह सा रे सा म; प म ग१ म; ध नि सा′ - सा′ नि१ प म; ग१ म रे सा; , नि सा; ।विशेष: राग बहार, वसंत व शरद ऋत में गाया जाने वाला अत्यंत

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