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Rageshri

  • स्वर आरोह में रिषभ व पंचम वर्ज्य, अवरोह में पंचम वर्ज्य। निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - षाढव। थाट खमाज। वादी/संवादी गंधार/निषाद। समय रात्रि का द्वितीय प्रहर

  • विश्रांति स्थान ग; म; ध; ।मुख्य अंग, नि१, ध, नि१ सा; ग म रे सा; ग म ध नि१ ध म; ग म रे सा;

  • आरोह-अवरोह सा ग म ध नि१ सा′ - सा′ नि१ ध म ग म रे सा; । विशेष - यह बहुत ही मधुर राग है। संगीत शास्त्रों के अनुसार राग रागेश्री में निषाद शुद्ध और निषाद कोमल का प्रयोग बताया गया है। परन्तु वर्तमान में इस… (246 more words) …

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राग बैरागी तोडी

  • स्वर मध्यम और धैवत वर्ज्य। रिषभ, गंधार और निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; रे१; प; मुख्य अंग, नि१ सा रे१ ग१; ग१ रे१, नि१, प; , नि१ रे१ सा; आरोह-अवरोह सा रे१ ग१ प नि१ सा′ - सा′ नि१ प ग१ रे१ सा; विशेष - राग बैरागी तोडी को पंडित रवि शंकर जी ने प्रचलित किया है। गाने में कठिन लेकिन मधुर है। राग बैरागी के मध्यम की जगह कोमल गंधार लेने से राग बैरागी तोड़ी अस्तित्व में आता है। यह राग तोड़ी थाट के अंतर्गत आता है।… (89 more words) …

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