NTA-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 29 of 52)

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राग शुद्ध कल्याण (Raga Sudhha Kalyana)

  • स्वर मध्यम और निषाद वर्ज्य आरोह में। अवरोह में मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट कल्याण। वादी/संवादी गंधार/धैवत। समय रात्रि का प्रथम प्रहर । विश्रांति स्थान सा ग प - प ग सा; मुख्य अंग ग रे ग; रे सा; , नि, ध, प; ग रे सा; ग रे ग; प रे सा; आरोह-अवरोह सा रे ग प ध सा′ - सा′ नि ध प म् ग रे सा; ग रे ग प रे सा; विशेष - राग शुद्ध कल्याण में आरोह में राग भूपाली और अवरोह में राग यमन के स्वर प्रयुक्त होते हैं।

  • इस राग को भूप कल्याण के नाम से भी जाना जाता है परन्तु इसका

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राग शुद्ध-सारंग (Raga Sudhha Saranga)

  • स्वर गंधार वर्ज्य। मध्यम दोनों। शेष शुद्ध स्वर।

  • जाति षाढव - षाढव। थाट कल्याण। वादी/संवादी रिषभ/पंचम। समय दिन का द्वितीय प्रहर। विश्रांति स्थान, नि; रे; प; नि; - सा’; नि; प; रे; मुख्य अंग, नि सा रे म् म् प; म् प म् म रे; रे, नि, नि सा; , नि, ध सा, नि रे सा; आरोह-अवरोह, नि सा रे म् प नि सा’ - सा′ नि ध प म् प म् म रे सा, नि सा; विशेष - दिन के रागों में राग शुद्ध सारंग एक बहुत ही प्रभावशाली राग है जो की श्रोताओं पर गहरा प्रभाव डालता है। अवरोह में दोनों मध्यम लगाते हुए रिषभ पर आया जाता

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