Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 130 key topics of CBSE-NET (UGC) Hindustani Music (Paper-II & Paper-III) covering entire 2017 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or .

Rs. 200.00 or

Abhogi Kanhada

स्वर पंचम, निषाद वर्ज्य। गंधार कोमल। बाकी सब शुद्ध स्वर।जाति औढव - औढव वक्र। थाट- काफी वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान रे; म; ध; सा; । इस राग का मुख्य अंग सा रे, ध सा; रे ग१ म; ग१ म रे सा है।आरोह-अवरोह सा रे ग१ म ध सा′ - सा′ ध म ग१ रे ग१ म रे सा; रे, ध, ध सा। विशेष - राग अभोगी कान्हड़ा दक्षिण भारतीय पद्धति का राग है। इसमें कान्हड़ा का अंग है, इसलिये गन्धार को अन्दोलित करते हुए ग१ म रे सा ऐसे वक्र रूप मे लिया जाता है।… (104 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

राग भूपाली

  • स्वर मध्यम, निषाद वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। थाट कल्याण। वादी/संवादी गंधार/धैवत। समय रात्रि का प्रथम प्रहर । विश्रांति स्थान सा; रे; ग; प; - प; ग; रे; सा; मुख्य अंग ग रे ग; प ग; ध प; सा′ ध प ग; प ग रे ग; ग रे सा; आरोह-अवरोह सा रे ग प ध सा′ - सा′ ध प ग रे सा रे, ध सा; विशेष: यह राग भूप के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह पूर्वांग प्रधान राग है। इसका विस्तार तथा चलन अधिकतर मध्य सप्तक के पूर्वांग व मन्द्र सप्तक में किया जाता है।… (289 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

f Page
Sign In