CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 27 of 52)

Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 217 key topics of CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) covering entire 2018 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or choose a topic to view more samples.

Rs. 350.00 or

राग मल्हार (राग मियाँ मल्हार)

  • स्वर अवरोह में धैवत वर्ज्य। गंधार कोमल। निषाद दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - षाढव वक्र। थाट काफी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय वर्षा ऋतु में रात्री के प्रहर। विश्रांति स्थान सा रे प नि - सा′ प रे। मुख्य अंग सा रे; रे प; ग१ ग१ म रे सा; , नि१, ध, नि, नि सा; आरोह-अवरोह, नि सा; म रे प; ग१ म रे सा; म रे प नि१ ध नि सा′ - सा′ नि१ ध नि१ प; म प ग१ ग१ म रे सा; विशेष - संगीत सम्राट तानसेन द्वारा अविष्क्रुत इस राग का मौसमी रागों में प्रमुख स्थान है। वर्षा ऋतु में जाया जाने वाला यह राग मिय

… (1091 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

राग बैरागी तोडी

  • स्वर मध्यम और धैवत वर्ज्य। रिषभ, गंधार और निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; रे१; प; मुख्य अंग, नि१ सा रे१ ग१; ग१ रे१, नि१, प; , नि१ रे१ सा; आरोह-अवरोह सा रे१ ग१ प नि१ सा′ - सा′ नि१ प ग१ रे१ सा; विशेष - राग बैरागी तोडी को पंडित रवि शंकर जी ने प्रचलित किया है। गाने में कठिन लेकिन मधुर है। राग बैरागी के मध्यम की जगह कोमल गंधार लेने से राग बैरागी तोड़ी अस्तित्व में आता है। यह राग तोड़ी थाट के अंतर्गत आता है। इसका चलन राग तोडी के समान

… (799 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

f Page
Sign In