CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 26 of 52)

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राग भीम

  • स्वर रिषभ, धैवत वर्ज आरोह में। निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट काफी। वादी/संवादी षड्ज/पंचम। समय दिन का तीसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; प; - सा’; प; ग; मुख्य अंग, नि१ सा ग म प (सा’) नि१; प (सा’) नि१ सा’; सा′ (प) ध प; ध म प; ग म रे, नि१ सा; आरोह-अवरोह, नि१ सा ग म प नि१ सा′ - सा′ नि१ ध प म ग प म; ग म रे सा; , नि१ सा; , प, नि१ सा। विशेष - राग भीम को गावती के नाम से भी जाना जाता है।

  • इस राग के उत्तरांग में कोमल निषाद को तार सप्तक के षड्ज का कण लगाते हुए ग

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राग बैरागी

  • स्वर गंधार और धैवत वर्ज्य। रिषभ और निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। थाट भैरव। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; रे१; म; प; मुख्य अंग म प नि१ प म रे१; रे१ प म रे१ सा; , नि१ सा रे१ सा; आरोह-अवरोह सा रे१ म प नि१ सा′ - सा′ नि१ प म रे१ सा; विशेष - राग बैरागी को पंडित रवि शंकर जी ने प्रचलित किया है। यह बहुत ही कर्णप्रिय राग है और भक्ति रस से परिपूर्ण है।
  • इस राग में किसी भी तरह का बन्धन नही है, इसलिये यह तीनों सप्तकों में उन्मुक्त रूप से गाया ज

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