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Bhairavi

  • स्वर रिषभ, गंधार, धैवत और निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण।थाट भैरवी वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; प; - सा’; प; म;

  • मुख्य अंग ग१ सा रे१ सा; ग१ म प; ध१ म ध१ नि१ सा′; रे१′ सा′ ध१ प ग१ म रे१ सा; ।आरोह-अवरोह सा रे१ ग१ म प ध१ नि१ सा′ - सा′ नि१ ध१ प म ग१ रे१ सा; ।विशेष - यह भैरवी थाट का आश्रय राग है। हालांकि इस राग का गाने का समय प्रातःकाल है पर इस राग को गाकर महफिल समाप्त करने की परंपरा प्रचार… (267 more words) …

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Nayaki Kanhada

  • स्वर धैवत वर्ज्य। गंधार व निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - षाढव वक्र। थाट काफी। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान रे; प; - प; म; रे; । मुख्य अंग रे, नि१ सा रे प (म) ग१; ग१ म प म रे सा रे सा; ग१ म नि१ प; नि१ म प (म) ग१ म प म रे सा रे रे सा; म प नि१ प सा‘; प नि१ प; ग१ म रे सा; । आरोह-अवरोह सा रे (म) ग१ म प नि१ प सा’ - सा′ नि१ प नि१ प म प (म) ग१… (202 more words) …

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