CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 24 of 52)

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राग हेमंत

  • स्वर आरोह में रिषभ व पंचम वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - संपूर्ण। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; म; ध; नि; मुख्य अंग ग म ध नि ध; म (प) म; नि ध (प) म; ग म ग रे सा; ग म ध प म ग रे सा; आरोह-अवरोह सा ग म ध नि सा′ - सा′ नि ध प म ग रे सा; विशेष - राग हेमंत बहुत ही मधुर राग है। राग कौशिक ध्वनि के अवरोह में जब पंचम और रिषभ स्वरों का भी उपयोग किया जाता है, तब राग हेमंत की उत्पत्ति होती है। इस राग में रिषभ को सीधा लगाया जाता है जैसे - ग रे सा परन्तु पंचम स्वर का उपयोग

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राग शंकरा

  • स्वर आरोह में रिषभ व मध्यम वर्ज्य। अवरोह में मध्यम वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर। (अवरोह में धैवत अल्प) । जाति औढव - षाढव वक्र। थाट बिलावल। वादी/संवादी गंधार/निषाद। समय रात्री का द्वितीय प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; प; नि; - नि; प; ग; सा; मुख्य अंग ग प नि ध सा′ नि; ध प ग प; प रे ग रे सा; आरोह-अवरोह सा ग प नि ध सा′ - सा′ नि प ग; प ध प ग; प ग रे सा; विशेष - राग शंकरा की प्रकृति उत्साहपूर्ण, स्पष्ट तथा प्रखर है। यह राग वीर रस से परिपूर्ण है। यह एक उत्तरांग प्रधान राग है। इसका स्वर विस्तार म

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