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राग गौड मल्हार

  • स्वर दोनों निषाद (आरोह में शुद्ध, अवरोह में कोमल) । शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण वक्र। थाट बिलावल। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय वर्षा ऋतु में रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; प; - सा‘; प; म; । मुख्य अंग सा रे ग म; रे ग म ग म, ग रे ग (रे) सा; म प ध नि१ प; म प ध नि सा‘; आरोह-अवरोह सा रे ग म; रे प; म प ध नि सा’ - सा′ नि१ ध नि१ प म; ग रे ग (रे) सा; रे ग म; विशेष - यह बहुत ही मधुर, चित्ताकर्षक… (274 more words) …

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राग श्री

  • स्वर आरोह में गंधार व धैवत वर्ज्य। रिषभ व धैवत कोमल, मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट पूर्वी। वादी/संवादी रिषभ/पंचम। समय दिन का अन्तिम प्रहर (सूर्यास्त) । विश्रांति स्थान सा; रे१; प; - प; रे१; सा; मुख्य अंग सा, नि रे१; रे१ रे१ प; म् पध१ म् ग रे१ ग रे१ सा; म् प नि सा′ रे१′; रे१′ नि ध१ प; म् ध१ म् ग रे१; ग रे१ सा; आरोह-अवरोह सा रे१ म् प नि सा′ - सा′ रे१′ नि ध१ प म् प ध१ म् ग रे१ सा; विशेष - राग श्री एक पुरुष… (212 more words) …

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