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Hamir

  • स्वर आरोह में रिषभ व पंचम वर्ज्य। मध्यम दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण वक्र

  • थाट कल्याण। वादी/संवादी धैवत/गंधार। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ध; सा‘; - सा‘; ध; प; रे; । मुख्य अंग प; ग म नि ध; ध प; ग म प ग म रे सा; । आरोह-अवरोह सा ग म ध; नि ध सा‘; या सा ग म नि ध प; ग म ध नि सा‘; - सा’ नि ध प; म् प ध प; ग म प; ग म रे सा; या सा′ नि ध प ग म रे सा; ।… (353 more words) …

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राग नारायणी

  • स्वर आरोह में गंधार, निषाद वर्ज्य। अवरोह में गंधार वर्ज्य। अवरोह में निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - षाढव। थाट खमाज। वादी/संवादी षड्ज/पंचम। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; प; - प; सा; मुख्य अंग सा रे, नि१, ध, प; , म, प, ध, प सा; म रे; म रे सा; सा रे प; म प नि१ ध ध प; ध प म रे सा;

  • आरोह-अवरोह सा रे म प ध सा′ - सा′ नि१ ध प म रे सा; विशेष: राग नारायणी को दक्षिण पद्धति के संगीत से हिन्दुस्तानी पद्धति में विद्वानों द्वारा लाया गया… (127 more words) …

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