CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 22 of 52)

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Durga

  • स्वर गंधार, निषाद वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव।थाट बिलावल। वादी/संवाद मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का दूसरा प्रहर

  • विश्रांति स्थान सा; रे; प; ध; - सा’; ध; म; रे;

  • मुख्य अंग म प ध; म रे, ध सा; रे रे प; । आरोह-अवरोह सा रे म प ध सा′ - सा′ ध प ध म रे सा, ध सा; । विशेष - रात्रि के रागों में राग दुर्गा बहुत मधुर और सब लोगों का प्रिय राग है। रे रे म रे; , ध, ध सा - यह स्वर संगती राग को स्पष्ट बनाती है। सभी शुद्ध स्वर लगने के बावजूद इस राग का एक विशिष्ट वातावरण पैदा होता है जो की स्

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Lalit

  • स्वर पंचम वर्ज्य। मध्यम दोनों। रिषभ व धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - षाढव वक्र। थाट पूर्वी । वादी/संवादी शुद्ध मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का अन्तिम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; म; - सा’; म; ग; । मुख्य अंग, नि रे१ ग म म् म ग रे१ सा; ग म् ध१ नि ध१ म् म; रे१’ नि ध१ म् म; ग म म् म; ग; म् ग रे१ सा; । आरोह-अवरोह, नि रे१ ग म् ध१ नि सा′ - सा′ नि ध१; म् ध१ म् म; ग म् ग रे१ सा; । विशेष- राग ललित एक बहुत ही मधुर राग है। इस राग में दोनों मध्यम (तीव्र व शुद्ध मध्यम) एक साथ (म् म; ग म् म; न

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