CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 21 of 52)

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Pilu

  • स्वर आरोह में रिषभ व धैवत वर्ज्य। दोनों गंधार, दोनों धैवत व दोनों निषाद। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण। थाट काफी। वादी/संवादी गंधार/निषाद। समय दिन का तीसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; प; नि; - नि१; प; ग१;

  • मुख्य अंग ग म प नि सा′; नि१ ध प; म प नि ध१ प; म ग१ रे सा; प ग१ रे सा, नि; सा ग१ रे सा;

  • आरोह-अवरोह सा ग म प नि सा′ - सा′ नि१ ध प म ग१ रे सा; , नि सा ग१ रे सा; । विशेष -, प, नि सा ग१; ग१ रे सा, नि; , नि सा - यह राग पीलू की राग वाचक स्वर संगती है। इस राग में कोमल गंधार औ

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Sindhura

  • स्वर आरोह में गंधार व निषाद वर्ज्य। अवरोह में गंधार व निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण। थाट काफी।वादी/संवादी षड्ज/पंचम।समय दिन का चतुर्थ प्रहर। विश्रांति स्थान सा; प; ध; - सा’; ध; प; ग१; । मुख्य अंग रे म प ध; नि१ ध प सा’; रे′ ग१′ रे′ सा′; नि१ ध प म ग१ रे; म ग१ रे सा; । आरोह-अवरोह सा रे म प ध सा′ - सा′ नि१ ध प म ग१ रे म ग१ रे सा; । विशेष - यह एक चंचल प्रकृति का राग है जो की राग काफी के बहुत निकट है। राग काफी से इसे अलग दर्शाने के लिए कभी कभी निषाद शुद्ध का प्रयोग आरोह

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