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Kirvani

  • स्वर गन्धार, धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर।

  • जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण। थाट किसी भी थाट के अंतर्गत नहीं। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा रे प - सा′ प रे। मुख्य अंग प ध१ सा′; सा′ नि सा′ रे′ ग′ रे′ सा′ नि ध१ प; ध१ प म प; प म ग१ रे; ग१ म; ग१ रे सा, नि, ध१, नि रे सा; । आरोह-अवरोह सा रे ग१ म प ध१ नि सा′ - सा′ नि ध१ प म ग१ रे सा; । विशेष - यह कर्नाटक संगीत से हिन्दुस्तानी संगीत में लिया हुआ राग है।… (130 more words) …

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राग सोहनी

  • स्वर आरोह में रिषभ व पंचम वर्ज्य, अवरोह में पंचम वर्ज्य। रिषभ कोमल, मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव-षाढव वक्र। थाट मारवा। वादी/संवादी धैवत/गंधार। समय रात्रि का चतुर्थ प्रहर। विश्रांति स्थान ग नि सा‘- सा’ ध ग। मुख्य अंग म् ध नि सा′ रे१′ सा‘; नि ध नि ध; आरोह-अवरोह सा ग म् ध नि सा’ - सा′ नि ध नि ध म् ग रे१ सा; विशेष - यह उत्तरांग प्रधान राग है। इसका विस्तार तार सप्तक में अधिक होता है। यदि इस राग का मंद्र सप्तक में विस्तार किया गया तो राग पूरिया दिखने लगता है और यदि… (236 more words) …

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