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MULTANI

  • स्वर आरोह में रिषभ व धैवत वर्ज्य। रिषभ, गंधार व धैवत कोमल। मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण। थाट तोड़ी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय दिन का तीसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग१; प; नि; । मुख्य अंग, नि सा; म् ग१; म् ग१ प; म् ग१ म् ग१ रे१ सा; । आरोह-अवरोह, नि सा ग१ म् प नि सा′ - सा′ नि ध१ प म् ग१ रे१ सा;

  • विशेष - यह अत्यंत मधुर राग है। राग तोडी से बचने के लिये राग मुलतानी में, नि सा म१ ग१ रे१ सा - यह स्वर समुदाय लिया जाता है। आलाप… (72 more words) …

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राग हेमंत

  • स्वर आरोह में रिषभ व पंचम वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - संपूर्ण। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; म; ध; नि; मुख्य अंग ग म ध नि ध; म (प) म; नि ध (प) म; ग म ग रे सा; ग म ध प म ग रे सा; आरोह-अवरोह सा ग म ध नि सा′ - सा′ नि ध प म ग रे सा; विशेष - राग हेमंत बहुत ही मधुर राग है। राग कौशिक ध्वनि के अवरोह में जब पंचम और रिषभ स्वरों का भी उपयोग किया जाता है, तब राग हेमंत की उत्पत्ति… (124 more words) …

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