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राग मल्हार (राग मियाँ मल्हार)

  • स्वर अवरोह में धैवत वर्ज्य। गंधार कोमल। निषाद दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - षाढव वक्र। थाट काफी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय वर्षा ऋतु में रात्री के प्रहर। विश्रांति स्थान सा रे प नि - सा′ प रे। मुख्य अंग सा रे; रे प; ग१ ग१ म रे सा; , नि१, ध, नि, नि सा; आरोह-अवरोह, नि सा; म रे प; ग१ म रे सा; म रे प नि१ ध नि सा′ - सा′ नि१ ध नि१ प; म प ग१ ग१ म रे सा; विशेष - संगीत सम्राट तानसेन द्वारा अविष्क्रुत इस राग का मौसमी रागों में प्रमुख स्थान… (147 more words) …

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राग रामकली

  • स्वर रिषभ व धैवत कोमल, दोनों मध्यम व दोनों निषाद। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण। थाट भैरव। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान प; ध१; - सा‘; प; रे१; मुख्य अंग म् प ध१ नि१ ध१ प; म् प ग म रे१ सा; आरोह-अवरोह सा रे१ ग म प ध१ नि सा’ - सा′ नि ध१ प; म् प ध१ नि१ ध१ प; म् प ग म रे१ सा; विशेष - ये भैरव अंग का राग है। इसमें रिषभ और धैवत पर राग भैरव की तरह अन्दोलन नहीं किया जाता।

  • इस राग को भैरव से… (70 more words) …

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