CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 2 of 52)

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Ahir Bhairav

  • स्वर रिषभ और निषाद कोमल। बाकी सब शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण।थाट- भैरव। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; रे१; म; प; - सा’; प; म; रे१;

  • मुख्य अंग ग म प; ध नि१ ध; प ध प सा′ नि१ ध; नि१ ध प म ग म; ग म प म रे१ रे१ सा; , नि१, ध, नि१ रे१ रे१ सा; । आरोह-अवरोह सा रे१ ग म प ध नि१ सा′ - सा′ नि१ ध प म ग रे१ सा; या सा′ नि१ ध प म ग म रे१ सा; । विशेष: राग अहीर भैरव का दिन के रागों में एक विशेष स्थान है। यह राग पूर्वांग में राग भैरव के समान है और उत्तरा

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Alhaiya Bilawal

  • स्वर आरोह में मध्यम वर्ज्य। निषाद दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - सम्पूर्ण।थाट- बिलावल। वादी/संवादी धैवत/गंधार।समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; प; - सा’; प; ग;

  • मुख्य अंग ग रे ग प; ध नि१ ध प; म ग रे; ग प ध नि सा’; ।आरोह-अवरोह सा रे ग प ध नि सा’ - सा′ नि ध प ध नि१ ध प म ग रे सा; । विशेष: राग बिलावल में कोमल निषाद के प्रयोग से राग अल्हैया बिलावल का निर्माण हुआ है। इसके अवरोह में निषाद कोमल का प्रयोग अल्प तथा वक्रता से किया जाता है जैसे ध नि१ ध प। यदि सीधे अवरोह लेना

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