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राग मांड

  • स्वर सब शुद्ध स्वर - कोई वर्ज्य नहीं। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण वक्र। थाट बिलावल। वादी/संवादी षड्ज/पंचम। समय रात्री का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा म प - सा′ ध म ग; मुख्य अंग ग म प ध सा′ नि ध; ध प म; म प; ग रे ग सा; आरोह-अवरोह सा रे ग म प ध नि प ध सा′ - सा′ नि ध प म ग रे ग सा; विशेष - राग मांड चंचल तथा क्षुद्र प्रक्रुति का, सुनने में सहज परंतु गायन वादन में कठिन राग है। मांड गायन वादन का विशेष प्रचार मारवाड में है। राजस्थान… (204 more words) …

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Saraswati

  • स्वर आरोह में गंधार व निषाद वर्ज्य, अवरोह में गंधार वर्ज्य। मध्यम तीव्र, निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - षाढव। थाट खमाज। वादी/संवादी पंचम/रिषभ। समय रात्रि का द्वितीय प्रहर। विश्रांति स्थान रे; प; सा‘; - ध; प; रे; । मुख्य अंग रे म् प ध नि१ ध; प म् ध प; म् रे म् प; ध सा’ नि१ ध; । आरोह-अवरोह सा रे म् प ध सा′ - सा′ नि१ ध प म् प म् रे सा, नि१, ध सा; । विशेष - इस माधुर्य से परिपूर्ण राग को कर्नाटक संगीत पद्धति से हिंदुस्तानी संगीत में लाया गया… (157 more words) …

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