CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 17 of 52)

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Nand

  • स्वर आरोह में रिषभ वर्ज्य। मध्यम दोनों। शेष शुद्ध स्वर। जाति षाढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट कल्याण। वादी/संवादी षड्ज/पंचम। समय रात्रि का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; म; प; - प; म; ग; सा;

  • मुख्य अंग सा ग म ध प रे सा; ग म प ध नि; (ध) प; प ध (प) म म प; ग म ध प रे सा; । आरोह-अवरोह सा ग म ध प रे सा; ग म प नि सा′ - सा′ ध नि प; ध म् प ग; ग म ध प रे सा; । विशेष - राग नन्द को राग आनंदी, आनंदी कल्याण या नन्द कल्याण के नाम से भी जाना जाता है। इस राग में बिहाग, गौड सारंग, हमीर व कामोद का आभ

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Madhumad Sarang

  • स्वर गंधार व धैवत वर्ज्य। निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। थाट काफी। वादी/संवादी रिषभ/पंचम। समय अपराह्न। विश्रांति स्थान सा; प; - सा’; प; । मुख्य अंग, नि१ सा रे; म रे; प म रे; नि१ प म रे; प म रे सा; । आरोह-अवरोह, नि१ सा; रे म प नि१ सा’ - सा′ नि१ प म रे सा; । विशेष - राग मधुमाद सारंग को मधमाद सारंग या मध्यमादी सारंग भी कहा जाता है। इस राग के स्वर राग बृंदावनी सारंग के ही सामान है परन्तु इस राग में सिर्फ कोमल निषाद का प्रयोग किया जाता है। इस राग के पूर्वांग में पंचम-रिषभ (

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