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राग भूपाल तोडी

स्वर मध्यम और निषाद वर्ज्य। रिषभ, गन्धार और धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। थाट भैरवी। वादी/संवादी धैवत/गंधार। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग१; प; ध१; - ध१; प; ग१; सा; मुख्य अंग सा, ध१ सा रे१ ग१; ध१ प ग१ रे१ ग१ रे१ सा; आरोह-अवरोह सा रे१ ग१ प ध१ सा′ - सा′ ध१ प ग१ रे१ सा, ध१ रे१ सा; विशेष - राग भूपाल तोडी, शुद्धता और पवित्रता का सूचक है। इसलिये इस राग में भक्ति रस से परिपूर्ण बन्दिशें अधिक सुनायी देतीं हैं। राग भूपाली में राग तोडी जैसे स्वर लेने… (68 more words) …

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राग मेघ मल्हार (राग मेघ)

  • स्वर गंधार व धैवत वर्ज्य। निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। थाट काफी। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय वर्षा ऋतु। विश्रांति स्थान सा; म; प; - प; म; रे; मुख्य अंग, नि१ सा रे प म रे; म प म रे; म प; प म नि प म रे; रे रे प म रे; रे सा, नि१ सा; आरोह-अवरोह सा (म) रे म प नि१ सा - सा′ नि१ प म रे सा रे, नि१ सा; विशेष - राग मेघ मल्हार बहुत ही मधुर और गंभीर वातावरण पैदा करने वाला राग है। इस राग के सभी स्वर राग मधुमाद… (297 more words) …

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