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राग देसी

स्वर आरोह में गंधार, धैवत वर्ज्य। अवरोह में निषाद वर्ज्य। गंधार, निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - षाढव वक्र। थाट काफी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; रे; प; - सा; प; रे; मुख्य अंग रे म प; ध म प सा′; सा′ प ध म प; रे ग१ सा रे, नि१ सा; आरोह-अवरोह सा रे म प नि१ सा′ - सा′ प ध म प रे ग१ सा रे, नि१ सा; विशेष - यह स्वर संगतियाँ राग देसी का रूप दर्शाती हैं - रे म प ध; म प; रे ग१; सा रे;… (3 more words) …

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Pilu

  • स्वर आरोह में रिषभ व धैवत वर्ज्य। दोनों गंधार, दोनों धैवत व दोनों निषाद। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण। थाट काफी। वादी/संवादी गंधार/निषाद। समय दिन का तीसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; प; नि; - नि१; प; ग१;

  • मुख्य अंग ग म प नि सा′; नि१ ध प; म प नि ध१ प; म ग१ रे सा; प ग१ रे सा, नि; सा ग१ रे सा;

  • आरोह-अवरोह सा ग म प नि सा′ - सा′ नि१ ध प म ग१ रे सा; , नि सा ग१ रे सा; । विशेष -, प, नि सा ग१; ग१ रे सा,… (190 more words) …

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