NTA-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 13 of 52)

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Nat Bhairav

  • स्वर धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण। थाट भैरव। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान रे; म; ध१; - ध१; म; रे; । मुख्य अंग रे ग म ध१ प; म ग रे; ग म रे सा, नि, ध१ सा; । आरोह-अवरोह सा रे ग म प ध१ नि सा′ - सा′ नि ध१ प म ग रे सा; । विशेष - राग नट भैरव, राग नट और राग भैरव से मिल कर बना है। पुर्वांग में राग नट और उत्तरांग में राग भैरव।

  • राग नट का स्वरूप है - म ग म रे; सा रे रे ग; ग म म प; म ग म रे; सा रे सा। और राग भैरव का स्वरूप है - प ध१ ध

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MULTANI

  • स्वर आरोह में रिषभ व धैवत वर्ज्य। रिषभ, गंधार व धैवत कोमल। मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण। थाट तोड़ी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय दिन का तीसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग१; प; नि; । मुख्य अंग, नि सा; म् ग१; म् ग१ प; म् ग१ म् ग१ रे१ सा; । आरोह-अवरोह, नि सा ग१ म् प नि सा′ - सा′ नि ध१ प म् ग१ रे१ सा;

  • विशेष - यह अत्यंत मधुर राग है। राग तोडी से बचने के लिये राग मुलतानी में, नि सा म१ ग१ रे१ सा - यह स्वर समुदाय लिया जाता है। आलाप की समाप्ति इन्ही स्वरों से की जाती है।

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