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राग बसंत

  • स्वर आरोह में रिषभ और पंचम वर्ज्य। मध्यम तीव्र। रिषभ और धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर। शुद्ध मध्यम का उपयोग कभी कभी - सा म म ग - ऐसे किया जाता है। जाति औढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट पूर्वी। वादी/संवादी तार षड्ज/पंचम ।समय रात्रि का दूसरा प्रहर या वसंत ऋतु में हर समय गाया जा सकता है। विश्रांति स्थान ग; सा; - सा‘; प; ग; मुख्य अंग सा म म ग; म् ध१ नि ध१ प; म् ध१ प; म् ग म् ग; म् नि ध१ म् ग रे१ सा; म् ध१ रे१’ सा‘; आरोह-अवरोह सा ग म् ध१ नि… (109 more words) …

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Hindol

  • स्वर रिषभ व पंचम वर्ज्य। मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। (अवरोह में निषाद अल्प) । जाति औढव - औढव वक्र। थाट कल्याण। वादी/संवादी धैवत/गंधार। समय रात्रि का तीसरा प्रहर। विश्रांति स्थान ग; ध; सा′ - सा‘; ध; ग; । मुख्य अंग ध ध नि म् ध सा’; ध म् ग; सा, ध, ध सा; । आरोह-अवरोह सा ग म् ध नि म् ध सा′ - सा′ नि ध म् ग म् ग सा, ध सा; । विशेष - यह राग मधुर परन्तु गाने में कठिन है इसीलिए इसे गुरु मुख से सीखना ही उचित है। इस राग में मध्यम तीव्र… (87 more words) …

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