NTA-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 12 of 52)

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Saraswati

  • स्वर आरोह में गंधार व निषाद वर्ज्य, अवरोह में गंधार वर्ज्य। मध्यम तीव्र, निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - षाढव। थाट खमाज। वादी/संवादी पंचम/रिषभ। समय रात्रि का द्वितीय प्रहर। विश्रांति स्थान रे; प; सा’; - ध; प; रे; । मुख्य अंग रे म् प ध नि१ ध; प म् ध प; म् रे म् प; ध सा’ नि१ ध; । आरोह-अवरोह सा रे म् प ध सा′ - सा′ नि१ ध प म् प म् रे सा, नि१, ध सा; । विशेष - इस माधुर्य से परिपूर्ण राग को कर्नाटक संगीत पद्धति से हिंदुस्तानी संगीत में लाया गया है। राग सरस्वती में पंचम-रिषभ संगती र

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Bilaskhani Todi

  • स्वर आरोह में मध्यम व निषाद वर्ज्य। अवरोह में पंचम वर्ज्य। रिषभ, गन्धार, धैवत व निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट भैरवी। वादी/संवादी धैवत/गंधार। समय दिन का दूसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग१; प; ध१; - ध१; प; ग; सा; । मुख्य अंग सा रे१, नि१, ध१ सा; सा रे१ ग१; रे१ ग१ प; प ध१ नि१ ध१; ध१ म ग१ रे१; ग१ रे१ सा; । आरोह-अवरोह सा रे१ ग१ प ध१ सा′ - सा′ रे१′ नि१ ध१; प; प ध१ नि१ ध१ म ग१ रे१; रे१ ग१ रे१ सा; । विशेष - यह राग, भैरवी थाट से उत्पन्न होता है। यह राग मियाँ तानस

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