NTA-NET (Based on NTA-UGC) Hindustani Music (Paper-II) Applied Theory-Detailed and Critical Study of Ragas Revision (Page 11 of 52)

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Hindol

  • स्वर रिषभ व पंचम वर्ज्य। मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। (अवरोह में निषाद अल्प) । जाति औढव - औढव वक्र। थाट कल्याण। वादी/संवादी धैवत/गंधार। समय रात्रि का तीसरा प्रहर। विश्रांति स्थान ग; ध; सा′ - सा’; ध; ग; । मुख्य अंग ध ध नि म् ध सा’; ध म् ग; सा, ध, ध सा; । आरोह-अवरोह सा ग म् ध नि म् ध सा′ - सा′ नि ध म् ग म् ग सा, ध सा; । विशेष - यह राग मधुर परन्तु गाने में कठिन है इसीलिए इसे गुरु मुख से सीखना ही उचित है। इस राग में मध्यम तीव्र है और इसे गाने के लिए बहुत रियाज़ की आवश्यकता है। यह राग ज्

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Yaman

  • स्वर मध्यम तीव्र। शेष शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण। थाट कल्याण। वादी/संवादी गंधार/निषाद

  • समय रात्रि का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; ग; नि; - सा’; नि; प; ग; । मुख्य अंग, नि रे ग; , नि रे म् ग; म् प; म् ध प नि ध प म् रे ग रे; , नि रे, ध, नि सा; ।आरोह-अवरोह, नि रे सा; , नि रे ग म् प ध नि सा’ - सा′ नि ध प म् ग रे सा; , नि रे सा; । विशेष - इस राग का प्राचीन नाम कल्याण है। कालांतर में मुगल शासन के समय से इसे यमन कहा जाने लगा। इस राग के अवरोह में जब शुद्ध मध्यम का अल्प प्रयोग

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