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राग शहाना कान्हडा

  • स्वर गंधार व निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर।

  • जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण वक्र। थाट काफी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय रात्रि का तीसरा प्रहर। विश्रांति स्थान सा; प; ध; - सा‘; ध; प; रे; मुख्य अंग प म ग१ म ध; ध नि१ प; सा’ ध नि१ प; ध म प ग१ म रे सा; आरोह-अवरोह, नि१ सा; रे ग१ म प; म ग१ म; ध नि१ प; म प ध नि१ सा′ - सा′ ध नि१ प; म प ग१ म रे सा; विशेष - राग शहाना कान्हड़ा में धैवत एक महत्वपूर्ण स्वर है जिस पर न्यास किया जाता है। अन्य… (136 more words) …

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राग केदार

  • स्वर आरोह में रिषभ व गंधार वर्ज्य। अवरोह में गंधार अल्प। मध्यम दोनो। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - सम्पूर्ण वक्र। थाट कल्याण। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय रात्रि का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; म; प; - सा‘; प; म; मुख्य अंग सा म; म प; म् प ध प म; सा रे सा; म् प ध प म् प सा’; सा′ रे′ सा′ सा′ ध ध प; आरोह-अवरोह सा म प ध नि सा′ - सा′ नि ध प; म् प ध प; म म रे सा; विशेष - रात्रि के प्रथम प्रहर में गाई जाने वाली यह रागिनी करुणा… (212 more words) …

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