Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 130 key topics of CBSE-NET (UGC) Hindustani Music (Paper-II & Paper-III) covering entire 2016 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or .

Rs. 200.00 or

Shivranjani

  • स्वर मध्यम व निषाद वर्ज्य, गंधार कोमल। शेष शुद्ध स्वर। जाति औढव - औढव। थाट काफी। वादी/संवादी पंचम/षड्ज। समय मध्य रात्रि
  • विश्रांति स्थान प; सा‘; - सा‘; प; । मुख्य अंग रे ग१ प; ध प ग१ रे; ग१ सा रे ध सा; । आरोह-अवरोह सा रे ग१ प ध सा’ - सा′ ध प ग१ रे सा; रे, ध सा;
  • विशेष - यह बहुत ही मधुर राग है। राग भूपाली में गंधार शुद्ध न लेते हुए गंधार कोमल लगाया जाये तो राग शिवरंजनी हो जाता है। यह स्वर संगतियाँ राग शिवरंजनी का रूप दर्शाती हैं - सा रे ग१… (297 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

Ahir Bhairav

  • स्वर रिषभ और निषाद कोमल। बाकी सब शुद्ध स्वर। जाति सम्पूर्ण - सम्पूर्ण।थाट- भैरव। वादी/संवादी मध्यम/षड्ज। समय दिन का प्रथम प्रहर। विश्रांति स्थान सा; रे१; म; प; - सा’; प; म; रे१;

  • मुख्य अंग ग म प; ध नि१ ध; प ध प सा′ नि१ ध; नि१ ध प म ग म; ग म प म रे१ रे१ सा; , नि१, ध, नि१ रे१ रे१ सा; । आरोह-अवरोह सा रे१ ग म प ध नि१ सा′ - सा′ नि१ ध प म ग रे१ सा; या सा′ नि१ ध प म ग म रे१ सा; । विशेष: राग अहीर भैरव… (248 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

Sign In