CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-रीतिकाल (Ritikal) Revision (Page 9 of 23)

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तृतीय कोटि के (रीतिमुक्त) कवि आलम, बोधा, ठाकुर व दव्जदेव

आलम

  • जीवन परिचय-ये जाति के बाह्यण थे और बादशाह बहादुरशाह के आश्रय में रहते थे। इनका कविता काल सं. 1740 सं सं. 1760 है। बाद में बड़े ही करामाती ढंग से इनका प्रेम एक रंगरेजिन से हो गया, जिसका नाम था शेख। इससे विवाह कर लेने का परिणाम यह हुआ कि मुसलमान हो गए। पति-पत्नी दोनों ही कवि थे।
  • रचना-इनकी रचना का सग्रह ’आलमकेलि’ नाम से निकला है। यत्र-तत्र और पद्य भी मिलते हैं।

बोधा

  • जीवन परिचय-घ्ानानंद की भाँति ये भी पन्ना दरबार की ’सुभान’ नामक वैश्या पर आसक्त थे, इसके कारण इन्हें छ: मास का दण्ड भी

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तृतीय कोटि के (रीतिमुक्त) कवि लाल

लाल

  • जीवन परिचय-रीतिकाल के वीर काव्य की रचना करने वाले कवियों में लाल कवि का नाम भी आदर के साथ लिया जाता है। इनका वास्तविक नाम गोरेलाल पुरोहित था। ये मऊ (बुंदेलखंड) के निवासी थे। लाल इनका कवि नाम था। महाराज छत्रसाल की आज्ञा से कवि लाल ने दोहा-चौपाई पदव्ति में छत्रसाल महाराज का जीवन चरित्र लिखा है।
  • रचना एवं वर्णन- इन्होंने अपने समसायिक राजा छत्रपाल को लेकर ’छत्रप्रकाश’ की रचना की। इसमें नायक से संबद्ध 1764 सं. तक का ही इतिहास आ पाया है। ग्रंथ रचना प्रौढ़ एवं काव्यगुणों से ओतप्रोत है। क

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