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दव्तीय कोटि के कवि (रीतिसिद्ध) कुमारमणि, देव

कुमारमणि

  • जीवन परिचय-कुमारमणि शास्त्री चिंतामणि, कुलपति आदि की परंपरा के ध्वनिरसवादी आचार्य हैं। इनका जन्म 1665 ई. के आसपास हुआ हैं।
  • रचनाएँ- इनके दो ग्रंथ मिलते हैं- ’रसिकरंजन’ (1708) और ’रसिकमाल’ (1719) । ’रसिकरंजन’ संस्कृत-कवियों की सेक्तियों का संग्रह है और ’रसिकमाल’ में क्रमश: काव्य-लक्षण, काव्य-प्रयोजन, काव्य-हेतु, काव्य-भेद, शब्द-शक्ति, ध्वनि, रस, नायिकाभेद, गुणीभूत व्यंग्य, शब्दालंकार, गुण और दोष का विवेचन किया गया है। यह ग्रंथ किन्हीं रामनरेश के आश्रय में लिखा गया है।
  • विशेषता-इनके रीति-निरूपण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्पष्ट और सीधी भाषा में विभिन्न विषयों का निरूपण गंभीरतापूर्वक किया गया है। इनका आधार यद्यपि… (741 more words) …

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दव्तीय कोटि के कवि (रीतिसिद्ध) अमीरदास

अमीरदास

  • जीवन परिचय-इस काल में जिन भक्तों ने रीति-निरूपण किया, उनमें निर्गुणधारा का प्रतिनिधित्व करने वाले आचार्य में अमीरदास का नाम विशेष सम्मान के साथ लिया जा सकता है इनका जन्म 1783 ई. के आसपास पंजाब के एक वैष्णव-परिवार में हुआ था। यह गुरु रामदास के शिष्य थे और उदासी-संप्रदाय में दीक्षित हुए थे। बाद में इन्होंने अमृतसर के कटरा लोहगढ़ में अपनी गद्दी स्थापित की थी। पटियाला के राजदरबार से इनका घनिष्ठ संबंध था। इनकी मृत्यु सन्‌ 1867 ई. के आसपास बतायी जाती है।
  • रचनाएँ-इनके दव्ारा रचित ये 12 ग्रंथ बताये जाते हैं- सभामंडन (1827), वृत्तचंद्रोदय (1830),… (567 more words) …

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