Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 365 key topics of CBSE-NET (UGC) Hindi Literature (Paper-II & Paper-III) covering entire 2016 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or .

Rs. 400.00 or

रीतिकाल के दव्तीय कोटि के (रीतिसिद्ध) कवि

रीतिसिद्ध काव्य

रीतिकाल तक आते-आते हिन्दी काव्य-साहित्य विकसित -वर्धित ही नहीं विविधमुखी भी बन चुका था। प्रमाण है- इस युग में पाया जाने वाला विविध प्रकार का विपुल कृतित्व। दुर्भाग्य से, लंबे समय तक इस काल साहित्य-विवेचन या तो उपेक्षित रहा अथवा इतिहासकार-आलोचकों के एकांगी दृष्टिकोण का शिकार। यहाँ तक कि इतिहासकार-प्रवर आचार्य रामचंद्र शुक्ल तक को इसके उप-विभाजन करने का समुचित आधार नहीं मिल सका, जिसके फलस्वरूप आधे दर्जन उपविभाग करके भी वे स्वयं उससे संतुष्ट नहीं हो सकते थे।

ध्यान दें तो रीतिकालीन संपूर्ण काव्य-कृतित्व का (और काव्य-प्रवृतियों का भी मूलकेंद्र हैं।

  • इनमें से प्रथम वर्ग का काव्य… (1139 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

रीतिकाल के दव्तीय कोटि के (रीतिसिद्ध) कवि रामसहायदास, पेजनस, मानसिंह

  • रामसहायदास -’बिहार- सतसई’ के अनुकरण पर ही रची गई इसी युग की एक प्रमुख सतसई काव्य-कृत्ति है- ’राम सतसई’ जिसका ’श्रृंगार सतसई’ के नाम से काशी से प्रकाशन भी हो चुका है। रचनाकार हैं रामसहायदास जो प्राय: ’भगतजी’ भी कहे गयो हैं। ये चौबेपुर (बनारस) निवासी अस्थान कायस्थ थे।

  • पन्ना निवासी पेजेनस -कवि का कोई ग्रंथ उपलब्ध नहीं है, यद्यपि शिवसिंह सरोज में इनकी दो रचनाओं-’नखशिख’ तथा ’मधु प्रिया’ की चर्चा की गई हैं तथा इनके श्रृंगारिक कवित्त-सवैये का एक सकंलन ’पजनेस प्रकाश’ नाम से प्रकाशित भी हो चुका है। इसकी भाषा में फारसी का प्राधान्य हैं।

  • राजा मानसिंह दव्जदेव… (49 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

Sign In