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कवियों के अनुसार रीतिकाल की उत्पत्ति, प्ररेणास्त्रोत, परिवेश व नीतिगत परंपरा

  • रीति की उत्पत्ति: - रीति शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत भाषा की ’रीङ्‌’ धातु से बतायी गयी है- ” रीङ्‌ गताविति धातों: सा व्युत्पत्या रीतिरुच्यते।” अर्थ हैं- काव्य-पंथ अथवा काव्य- मार्ग, काव्य प्रणाली। पद्धति, शैली आदि भी इसी के पर्याप्त हैं, तो रीतिरात्मा काव्यस्य (आचार्य वामन्‌), ’काव्य- स्वभाव (चिंतामणि) तथा ’काव्य-दव्ार’ (देव) आदि इसके काव्य-रचना करने के अर्थ में ग्रहण किया गया है। इसी से कहा गया कि ”रीतिकाव्य वह काव्य है जो अलंकार, रस नायिका-भेद, गुण, ध्वनि, वक्रोक्ति आदि काव्य के सिद्धांत के आधार पर या इनको ध्यान में रखकर लिया जाए।”
  • पृष्ठीभूमि और प्रेरणास्त्रोत- सिद्धांत अथवा काव्यशास्त्र में तो… (634 more words) …

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नीतिकार एवं सूक्तिकार के कवि जोधराज, बैताल, राय एवं घाघ

जोधराज-

  • जीवन परिचय-इनके अतिरिक्त कवि जोधराज का नाम भी वीररस से युक्त रचनाकारों में आदर के साथ लिया जाता है जिन्होंने हम्मीर रासो नामक एक प्रबंध काव्य की रचना की जिसमें रणथंमोर के प्रसिद्ध वीर महाराज हम्मीर देव के चरित्र का वर्णन छप्पय पद्धति में किया गया है हम्मीर देव ने दिल्ली के खिलजी सुलतान अलाउद्दीन को कई बार पराजित किया और अंत में उसी के साथ युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।

बैताल

  • मध्यकालीन नीतिकार कवियों में इनका भी बड़ा सम्मान रहा है। यदि ये चरखारी वाले प्रसिद्ध विक्रमसिंह के दरबारी हैं तो इनका समय सं.… (189 more words) …

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