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रीतिकाल के प्रथम कोटि (रीतिबद्ध) के आचार्य भूषण

  • भूषण

  • जीवन परिचय-रीतिकाल की सामान्य रूप से प्रचलित श्रृंगारधारा को छोड़कर वीर से परिपूर्ण काव्य की रचना करने वाले कवियों में भूषण का स्थान सर्वोच्च है। चिंतामणि एंव मतिराम के ये भाई ही थे। हिन्दी साहित्य में इनकी ख्याति वीर रस के कवि के रूप में है। इनका जन्मकाल सं. 1670 हैं। इनके वास्तविक नाम का पता नहीं है। ये ग्राम तिकवाँपुर जिला कानपुर (उत्तर प्रदेश) कान्यकुब्ज ब्राह्यण थे। कवि भूषण तो सोलंकी राजा रुद्र की दी हुई उपाधि है। तभी से भूषण के नाम से प्रसिद्ध हुए। इनका वास्तविक नाम क्या था, इस विषय में कुछ नहीं कहा… (584 more words) …

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दव्तीय कोटि (रीतिसिद्ध) कवि रसलीन

रसलीन

  • जीवन परिचय-व्यवस्थित विवेचन और कवित्व का समान रूप से निर्वाह करते हुए रीतिनिरूपण करने वाले इस युग के इने-गिने आचार्यों में सैयद गुलाम नबी रसलीन (1699 - 1750) का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह उत्तरप्रदेश के जिला हरदोई के प्रसिद्ध साहित्य-केन्द्र बिलग्राम के रहने वाले थे। इनके मामा मीर अब्दुल जीमल और गुरु मीर तुफैल अहमद अच्छे कवि थे, जिनसे इन्हे काव्य रचना की प्रेरणा मिलीं इनके पिता का नाम सैयद मुहमद बाकर था। यह अच्छे संगीतज्ञ होने के साथ-साथ सुयोग्य सैनिक, तीरन्दाज और घुड़सवार भी थे तथा नवाब सफ़दरजंग की सेना में काम करते थे। रामचेतौनी के… (435 more words) …

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