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दव्तीय कोटि के कवि (रीतिसिद्ध) भिखारीदास

भिखारीदास

  • जीवन परिचय- जीवन परिचय-इनके अंतर रीति-ग्रंथ प्रणेताओं की भीड़-सी लगी दिखाई पड़ती है, ’जग-नामा’ के रचियता रीधर या मुरलीधर (सं. 1737 ज. का. ), बिहारी सतसई कवि प्रिया आदि के टीकाकार तथा अलंकार माला, रस रत्नमाला आदि के प्रणेता सूरति मिश्र, रस चंद्रोदय, विनोद चंद्रिका के निर्माता उदयनाथ, सतसई के टीककार बिहारी के पुत्र कृष्ण कवि, अलंकार चंद्रोदय के जन्मादाता रसिकसुमति आदि-आदि आलंकारिकों के अंतर ख्यातनामा और उल्लेखनीय आचार्य भिखारीदास हो गए हैं। ये अवध जिला के श्रीवास्तव कायस्थ थे। ये कृपालदास के पुत्र, वीरभानु के पौत्र, रायरामदास के प्रपौत्र थे। स्वयं दासजी अवधेशलाल के पिता एवं गौरीशंकर… (678 more words) …

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केवल रीतिकालीन (काव्य) साहित्य का विभाजन व विभिन्न परिस्थितियाँ

आचार्य रामचंद्र शुक्ल रीतिकाल साहित्य का सर्वप्रथम सशक्त विभाजन किया था। जिन्होंने मुख्यत: इसको वर्ण्य विषय के आधार पर दो वर्गों में रखा- रीतिबद्ध और रीतिमुक्त। रीतिमुक्त कवियों (या काव्य) को उन्होंने सात उप-वर्गों में रखा था। प्रमुख विभाजन तो आजकल भी ज्यों या त्यों स्वीकार किया जाता है, किन्तु उप-विभाजन पर आज आपत्ति ही नहीं उठाई जाती, नये-नये नामों से पुनर्विभाजन भी किया जाता है। इसका श्रीगणेश भी डॉ. रसाल ने ही कर दिया था, जिन्होंने समस्त रीतियुगीन काव्य-कवियों को 11 वर्गों में रखा हैं जो निम्न हैं-

  • लक्षण ग्रंथकार
  • जय (वीर) काव्य
  • पौराणिक कथा या प्रबंध काव्य
  • कृष्ण… (1278 more words) …

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