CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-रीतिकाल (Ritikal) Revision (Page 3 of 23)

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रीतिकाल की विशेषताएँ

इस काल की सामान्य विशेषताओं पर ध्यान देना चाहिए था और यह देखने का प्रयत्न करना चाहिए कि कहाँ तक परिस्थितियाँ उनके उद्भव के प्रति उत्तरदायी है। राजनीतिक दृष्टि से यह काल औरंगजेब के शासनकाल से आरंभ होकर मुगल राज्य के पतन तक चला जाता है। औरंगजेब की कट्टर धार्मिक एवं राजनीतिक नीति ने आंतरिक क्षेत्र में पर्याप्त अंशाति फैल दी थी, पर कला एवं साहित्य की दृष्टि से वह काल उत्कर्ष पर था। यहाँ आपातत: विरोध लक्षित होता है, विचारत: नहीं। उन दिनों मुगल सल्तनत की छाया में छोटे-बड़े राजे, रईस एवं जमी

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कवियों के अनुसार रीतिकाल की उत्पत्ति, प्ररेणास्त्रोत, परिवेश व नीतिगत परंपरा

  • रीति की उत्पत्ति: - रीति शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत भाषा की ’रीङ्‌’ धातु से बतायी गयी है- ” रीङ्‌ गताविति धातों: सा व्युत्पत्या रीतिरुच्यते।” अर्थ हैं- काव्य-पंथ अथवा काव्य- मार्ग, काव्य प्रणाली। पद्धति, शैली आदि भी इसी के पर्याप्त हैं, तो रीतिरात्मा काव्यस्य (आचार्य वामन्‌), ’काव्य- स्वभाव (चिंतामणि) तथा ’काव्य-दव्ार’ (देव) आदि इसके काव्य-रचना करने के अर्थ में ग्रहण किया गया है। इसी से कहा गया कि “रीतिकाव्य वह काव्य है जो अलंकार, रस नायिका-भेद, गुण, ध्वनि, वक्रोक्ति आदि काव्य के सि

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