Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 483 key topics of CBSE-NET (UGC) Hindi Literature (Paper-II & Paper-III) covering entire 2017 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or choose a topic to view more samples.

Rs. 450.00 or

रीतिकाव्य में लोकजीवन

रीतिकाव्य में लोकजीवन

रीतिकाल राजाओं-सामंतों के वैभव-विलास का युग था। स्पष्टत: उनका वर्णन काव्य में प्रमुख होना ही था। परन्तु लोकजीवन से विमुख नहीं था क्योंकि कवि जीवन-जगत का गहन अनुभव रखने वाले थे। उन्होंने समाज के विस्तृत फलक का चित्रण किया है जैसे -चोर-शाह, शूर-कायर, मूर्ख-पंडित, नगर के रहने वाले -गाँव के रहने वाले, विभिन्न काम-धंधे करने वाले। विशेषत: बिहारी में तो नागरा समाज बखूबी उभरकर सामने आया है।… (116 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

रीतिकाल में आरोप, काव्यशास्त्र व उनकी कोटियाँ

कुछ आरोप और समाधान

  • रीतिकाव्य पर कुछ आरोप अथवा दोष सामान्यत: लगाये गये हैं तथा संस्कृत काव्य शास्त्र का अंधनुकरण, अस्पष्ट विवेचन, अश्लीलतापूर्ण श्रृंगार की प्रधानता, नायिका-भेद की प्रमुखता, रूढ़िवादिता, आश्रयदाता की अंध प्रशंसा या स्तुति, नारी या असंगत चित्रण तथा कला के प्रति अतिशय रुझान आदि। नि: संदेह इनमें से अधिकांश आरोप एकदम सच्चे भी हैं। फिर भी, यदि ध्यान से देखें तो अधिकांश दोष उस युग की ही… (372 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

f Page
Sign In