CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-रीतिकाल (Ritikal) Revision (Page 21 of 23)

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रीतिकाल के दव्तीय कोटि के (रीतिसिद्ध) कवि रामसहायदास, पेजनस, मानसिंह

  • रामसहायदास -’बिहार- सतसई’ के अनुकरण पर ही रची गई इसी युग की एक प्रमुख सतसई काव्य-कृत्ति है- ’राम सतसई’ जिसका ’श्रृंगार सतसई’ के नाम से काशी से प्रकाशन भी हो चुका है। रचनाकार हैं रामसहायदास जो प्राय: ’भगतजी’ भी कहे गयो हैं। ये चौबेपुर (बनारस) निवासी अस्थान कायस्थ थे।

  • पन्ना निवासी पेजेनस -कवि का कोई ग्रंथ उपलब्ध नहीं है, यद्यपि शिवसिंह सरोज में इनकी दो रचनाओं-’नखशिख’ तथा ’मधु प्रिया’ की चर्चा की गई हैं तथा इनके श्रृंगारिक कवित्त-सवैये का एक सकंलन ’पजनेस प्रकाश’ नाम से प्रकाशित भी हो

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रीतिकाल के दव्तीय कोटि के (रीतिसिद्ध) कवि चिंतामणि त्रिपाठी

चिंतामणि त्रिपाठी

  • जीवन परिचय: -कानपुर जिला के अंतर्गत तिकवांपुर स्थान के निवासी त्रिपाठी के चार पुत्र हुए और चारों कवि थे- चिंतामणि, मतिराम, भूषण एवं जयशंकर या जटाशंकर। चिंतामणि इनमें सबसे बड़े थे। इनमें से प्रथम तीन तो हिंदी साहित्य में काफी प्रसिद्ध है। चिंतामणि ने सं. 1707 में कविकुल कल्पतरु की रचना की। शिवसिंह सरोजकार ने इन्हें नागपुर के भेंसला मकरंद शाह के दरबारी कवि के रूप में माना है। रीतिकाल के आरंभ सं. 1666 तथा कविता काल संवत 1700 के आस-पास है। उनके प्रमुख ग्रंथों के आधार पर

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