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रीतिकाल के प्रवर्तक आचार्य केशवदास

केशवदास (रीतिकाल के प्रवर्तक)

  • रीतिकालीन कवियों में आचार्य कैशवदास को प्रमुख स्थान दिया जाता है। उन्होंने काव्य के लक्षण ग्रंथों की रचना की जिसके माध्यम से व्याकरण जैसे रस छंद आदि का वर्णन किया गया है।

केशव के विषय में मतभेद-

  • रीति ग्रंथों का प्रवर्तक किसको माना जाए? इस संबंध में विदव्ानों ने पर्याप्त मतभेद हैं। कुछ विदव्ान केशव को रीतिकाल का प्रवर्तक मानते है तथा कुछ ने चिंतामणि
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रीतिकाल के प्रथम कोटि (रीतिबद्ध) के आचार्य देव

कविवर्य देव

जीवन परिचय-इनका पूरा नाम देवदत्त था। इनकी जन्मीभूमि इटावा जिले में थी। कुछ दिनों पूर्व इन्हें सनाढ्‌य ब्राह्यण माना जाता रहा है, पर डॉ. नगेंद्र ने अपने नव-अनुसंधान दव्ारा स्थिर किया है कि वे कश्यप गोत्रिय कान्यकुब्ज ब्राह्यण थे। इनके ग्रंथों के अवलोकन से ऐसा लगता है कि इन्हें लोगों के आश्रय में घूमना पड़ा था, पर कहीं मन जमा नहीं। पहले-पहल ये औरंगजेब के तीसरे लड़के

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